अबॉर्ट सिस्टम
Abort system help astronauts in emergency: स्पेस मिशन बेहद जोखिम भरे होते हैं. लॉन्च के समय अगर कुछ भी गलत हो जाए, तो इससे एस्ट्रोनॉट्स को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पेस एजेंसियां एस्ट्रोनॉट्स के लिए खास सुरक्षा व्यवस्था करती हैं. इसे ‘अबॉर्ट सिस्टम’ कहा जाता है. आपको विस्तार से बताते हैं कि अबॉर्ट सिस्टम कैसे काम करता है.
कनाडाई एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने बताया कि लॉन्च के दिन रॉकेट पूरी तरह ईंधन से भरा होता है. एस्ट्रोनॉट्स लिफ्ट से ऊपर जाते हैं, सीट बेल्ट बांधते हैं और उड़ान के लिए तैयार रहते हैं. लेकिन अगर लॉन्च से पहले रॉकेट में कोई समस्या आ जाए, तो उनके पास दो मुख्य विकल्प होते हैं.
एस्ट्रोनॉट्स को लॉन्च पैड से लेकर पानी में उतरने तक हर तरह की इमरजेंसी स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है. अबॉर्ट सिस्टम आधुनिक स्पेसक्राफ्ट की सबसे जरूरी सुरक्षा तकनीकों में से एक है. यह सुनिश्चित करता है कि अगर लॉन्च के समय कोई अनहोनी हो जाए, तो अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित धरती पर वापस लौट सकें.
पहला विकल्प काउंटडाउन के शुरुआती चरण में इस्तेमाल किया जाता है. अगर समस्या लॉन्च से काफी पहले आती है, तो एस्ट्रोनॉट्स इमरजेंसी एग्जिट (हैच) खोलकर लॉन्च टावर से दूर निकल सकते हैं. इसके लिए टोकरियों और स्लाइड वायर्स का इस्तेमाल किया जाता है. नीचे उतरने के बाद वे बंद गाड़ियों में बैठकर लॉन्च पैड से तेजी से दूर चले जाते हैं.
यह भी पढ़ें: सौरव गांगुली ने मंत्री दिलीप घोष से की मुलाकात, तस्वीर वायरल होते ही राजनीति गलियारे में मची हलचल
दूसरा विकल्प ‘अबॉर्ट सिस्टम’ है, जो लॉन्च से कुछ मिनट पहले या लॉन्च के शुरुआती चरण में इस्तेमाल किया जाता है. अगर लॉन्च का समय नजदीक आ चुका हो और रॉकेट में आग लगने या किसी गंभीर समस्या की आशंका हो, तो यह सिस्टम एक्टिव हो जाता है. यह पूरे कैप्सूल यानी ओरियन को रॉकेट के ऊपरी हिस्से से अलग कर देता है. यह पूरे कैप्सूल के लिए एक बड़ी इजेक्शन सीट की तरह काम करता है. अलग होने के बाद कैप्सूल पैराशूट की मदद से पास के समुद्र में सुरक्षित उतरता है. वहां से अंतरिक्ष यात्री बाहर निकलकर बचाव दल की मदद लेते हैं.
MP SUGAM PARIVAHAN SEVA LAUNCH: मध्य प्रदेश में सरकारी निगरानी वाली सुलभ और सुरक्षित यात्री…
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग…
एडीआर ने नेशनल इलेक्शन वॉच के साथ लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए निर्वाचित…
बिहार के लखीसराय में 60 साल के पिंकू सिंह ने 23 साल की वर्षा रानी…
सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में राज्यों के बीच…
बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच…