Bhojpur Temple, Madhya Pradesh
Sawan 2025: मध्य प्रदेश के भोपाल से 32 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में प्रसिद्ध भोजपुर मंदिर (Bhojpur Temple) स्थित है.यह मंदिर बेतवा नदी की हरी भरी वादियों में प्रकृति और आस्था का एक अनूठा गठजोड़ है. भोजपुर मंदिर की प्राचीन वास्तुकला बेहद आकर्षक है. सावन के महीने में शिवभक्तों की काफी भीड़ उमड़ रही है. दूर दूर से लोग यहां आकर पूजा अर्चना कर रहे हैं.
Bhojpur Temple का निर्माण (1010 ई-1055 ई) में परमार वंश के राजा भोज प्रथम ने कराया था लेकिन यह मंदिर पूरा नहीं बन पाया. आज भी यह मंदिर अधूरा पड़ा हुआ है.
मंदिर के अधूरा रहने के पीछे कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं प्रचलित है.
कहते है राजा भोज प्रथम इस मंदिर का निर्माण करा रहे थे इसी दौरान उनकी मृत्यु हो गई इसीलिए इसका निर्माण कार्य रुक गया और मंदिर अधूरा ही रह गया.
दूसरी कथा के अनुसार मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया था. पांडवो ने कुंती माता की पूजा करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था. उनका संकल्प था कि इस मंदिर का निर्माण रात भर में करना है लेकिन सूर्योदय होने तक यह पूरा नहीं बन पाया और इस तरह यह मंदिर अधूरा ही छोड़ दिया.
एक अन्य मान्यता के अनुसार मंदिर का निर्माण एक बड़ी चट्टान को बिना काटे किया जा रहा था जिसके कारण बहुत ही परिश्रम और समय लग रहा था इसीलिए यह पूरा नहीं किया जा सका.
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भोजपुर मंदिर में 5.5 मीटर यानी 18 फीट का विशाल शिवलिंग है जो विश्व के सबसे बड़ा शिवलिंग है. ये शिवलिंग एक पत्थर से बना है. शिवलिंग का व्यास 2.3 मीटर यानी 7.5 फीट है. इस विशालकाय शिवलिंग के प्रति शिवभक्तों में बहुत आस्था है.
भोजपुर मंदिर की स्थापत्य कला भूमिज शैली आधारित है, जिसकी विशेषता मंदिर के विशाल शिखर और अलंकृत नक्काशी है. भोजपुर मंदिर को भोजेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर को लेकर कई पुस्तकें और शोधपत्र लिखे जा चुके हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग मंदिर की देख रेख करता है और सन 1950 से वह इससे संबंधित जानकारियां भी जुटा रहा है. फिलहाल यह मंदिर पूरा क्यों नहीं बन पाया इसका कोई ठोस जवाब नहीं है.
सावन के महीने में इन दिनों Bhojpur Temple क्षेत्र में मेला लगा हुआ है जिसमें लाखों शिवभक्त पहुंच कर पूजा अर्चना कर रहे हैं. मेले के साथ यहां शिवभक्त भंडारे भी चला रहे हैं. यहां आने वाले लोग भंडारे का भोजन प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर रहे हैं.
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–भारत एक्सप्रेस
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