आस्था

Jitiya Vrat Katha: जितिया पर पढ़ें चील और सियारिन की ये खास व्रत कथा, पूरे साल संतान रहेगी सुरक्षित

Jitiya Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल जितिया व्रत 14 सितंबर, रविवार को रखा जाएगा. इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है. इस दिन माताएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और फिर निर्जला व्रत शुरू करती हैं. यह उपवास अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण के साथ पूरा होता है.

जितिया व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha)

जितिया की कथा के अनुसार, गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन को उनके पिता के वन जाने के बाद राजा बनाया गया. जीमूतवाहन में भी अपने पिता के समान ही गुण थे. वे भी परोपकारी और दयालु स्वभाव के थे. उन्होंने लंबे समय तक अपने राज्य पर शासन किया और प्रजा की सेवा की. फिर वे भी अपने पिता की तरह राजपाट छोड़कर वन चले गए. वन में काफी समय व्यतीत करने के बाद एक दिन जीमूतवाहन की मुलाकात एक वृद्धि महिला से हुई, जो नाग वंश की थी. वह काफी डरी हुई थी. जीमूतवाहन ने उससे पूछा कि वो भयभीत और चिंतित क्यों है? तो उसने बताया कि नाग वंश के लोगों ने पक्षरीज गरुड़ से समझौता किया है कि उनके आहार के लिए नाग वंश का एक सदस्य उनके पास जाएगा. इस वचन के अनुसार, आज के दिन उसके बेटे को गरुड़ के पास जाना है. इसे वजह से वह डरी हुई है कि आज उसके बेटे के प्राणों पर संकट है.

यह सोच-सोचकर वह काफी दुखी है. तब जीमूतवाहन ने कहा कि तुम परेशान न हो. तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं होगा. तुम्होरे बेटे के बदले वह स्वयं पक्षीराज गरुड़ के पास जाएंगे. जीमूतवाहन उनका आहार बनने के लिए तैयार थे. उनकी बातों को सुनकर वह वृद्ध महिला शांत हुई और बेटे के बचने की खुशी उसके चेहरे पर दिखने लगी. उस दिन पक्षीराज गरुड़ के पास नाग वंश के सदस्य के जाने का समय आया तो जीमूतवाहन स्वयं वहां पहुंच गए. जीमूतवाहन ने अपने शरीर को लाल रंग के कपड़े से लपेट रखा था. पक्षीराज गरुड़ आए और जीमूतवाहन को अपने मजबूत पंजों में जकड़ लिया और अपने साथ लेकर उड़ गए. गरुड़ ने देखा कि जीमूतवाहन दर्द से चीख और रो रहे हैं. तब गरुड़ एक ​स्थान पर रुके तो जीमूतवाहन ने उनको सारी घटना बताई. जीमूतवाहन की दया और परोपकार की भावना से पक्षीराज गुरुड़ काफी प्रभावित हुए, उन्होंने जीमूतवाहन को जीवनदान दे दिया. जीमूतवाहन के प्राण बच गए.

जितिया व्रत का महत्व

जितिया व्रत संतान की दीर्घायु और सुरक्षा के लिए किया जाता है. विश्वास है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने और कथा सुनने वाली माताओं की संतान पर संकट नहीं आता और उन्हें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

पारण का समय

यह व्रत 15 सितंबर, सोमवार की सुबह 6:06 बजे के बाद पारण किया जाएगा. इसी के साथ तीन दिवसीय पर्व का समापन होता है.

Also Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस 

Akansha

Recent Posts

दिल्ली में मंचन हुआ ‘अमर बलिदान’, गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को किया याद

दिल्ली के श्रीराम सेंटर में ‘अमर बलिदान’ नाटक का मंचन हुआ. गुरु तेग बहादुर जी…

4 minutes ago

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, INDIA ब्लॉक दोनों सदनों में लाएगा प्रस्ताव

Gyanesh Kumar removal impeachment: CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए INDIA ब्लॉक फिर नया…

5 minutes ago

‘सिर्फ समय काट रहे कुछ देश!’ UNGA में जयशंकर का करारा हमला, खोली विरोधियों की पोल

S Jaishankar UN Speech: संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन…

27 minutes ago

पीएम मोदी ने सेवा यात्रा में शामिल युवाओं से किया संवाद, बोले- अनुभव जीवनभर आएंगे काम

पीएम मोदी ने वाराणसी से वडनगर जा रही सेवा यात्रा के युवाओं से बातचीत की.…

35 minutes ago

नूर खान से लेकर इस्लामाबाद सब होगा खाक! IAF को मिला ब्रह्मोस से भी बड़ा ‘ब्रह्मास्त्र’, PAK के क्यों छूटे पसीने?

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 160 SAT-SAAW ग्लाइड बम खरीदने के लिए ₹811…

45 minutes ago

कहीं 3 रुपये तो कहीं 400 रुपये लीटर, आखिर दुनिया में क्यों है पेट्रोल के दाम में इतना बड़ा फर्क?

Cheapest Petrol In World: दुनिया में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग हैं. वेनेजुएला और ईरान जैसे…

53 minutes ago