आस्था

पितृ पक्ष 2026: आज है चतुर्थी श्राद्ध, जानें विधि, नियम और विशेष धार्मिक महत्व

Pitru Paksha 2026: भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू हुआ 16 दिनों का पवित्र पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और आभार व्यक्त करने का पावन समय है. इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू हुआ यह पितृ पक्ष 10 अक्टूबर तक चलेगा. इसी कड़ी में आज 30 सितंबर (बुधवार) को चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. सनातन परंपरा के अनुसार, जिन पूर्वजों का निधन किसी भी माह की चतुर्थी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान इसी दिन करने का विधान है.

चतुर्थी श्राद्ध का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पितृलोक से धरती पर आते हैं और अपने वंशजों के बीच अदृश्य रूप में वास करते हैं. इस दौरान श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण और दान पितरों की आत्मा को परम तृप्ति प्रदान करता है. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष हो, उनके लिए इस दिन पूजा-पाठ और दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है. इससे घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास होता है.

श्राद्ध और पूजन की सरल विधि

पितरों को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पूरी पवित्रता के साथ निम्नलिखित विधि से पूजन करें:

स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद हाथ में जल लेकर पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्राद्ध का संकल्प लें.

तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके हाथ में जल, कुशा, अक्षत और काले तिल लेकर पितरों को जलांजलि (तर्पण) दें.

पिंडदान: पके हुए चावल, जौ के आटे, तिल और घी को मिलाकर पिंड बनाएं और पूर्वजों को अर्पित करें.

पंचबलि भोग: श्राद्ध का भोजन तैयार होने पर सबसे पहले पंचबलि निकालें. यानी भोजन का अंश गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटियों के लिए अलग रखें. इन्हें पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है.

ब्राह्मण भोज व दान: अंत में सम्मानपूर्वक सात्विक भोजन कराकर योग्य ब्राह्मण को वस्त्र, तिल और यथाशक्ति दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें.

शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय यानी कुटुप काल या अभिजीत मुहूर्त में ही करना चाहिए. सुबह या शाम के समय श्राद्ध करना वर्जित माना गया है. पूरी श्रद्धा और नियम से किया गया यह कार्य परिवार पर पितरों की कृपा बनाए रखता है.

धर्म, आध्यात्म से जुड़ी अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें. साथ ही आज के राशिफल के लिए यहां क्लिक करें.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

Recent Posts

एशियाई खेल: पीएम मोदी ने महिला 4×400 मीटर रिले टीम को दी ऐतिहासिक स्वर्ण पदक की बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई खेलों में महिला 4x400m रिले टीम (किरण, पूवम्मा, प्राची और…

3 hours ago

पूर्वांचल के किंगमेकर: ओम प्रकाश राजभर ने उप-जाति की पहचान को कैसे बनाया राजनीतिक पूंजी

पूर्वांचल की राजनीति में ओम प्रकाश राजभर एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी उप-जाति की…

3 hours ago

न सांसद, न विधायक फिर भी राजनीति के अमर योद्धा, जानिए क्यों आज भी प्रासंगिक हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय?

पंडित दीनदयाल उपाध्याय न सांसद बने न विधायक, लेकिन सिद्धांतों और मूल्यों की राजनीति के…

4 hours ago

दिल्ली-NCR में लागू हुआ नया GRAP, AQI के हिसाब से लगेंगी 4 लेवल की पाबंदियां, खराब हवा में बढ़ेगी पार्किंग फीस

Delhi GRAP New Rules: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर CAQM ने 29 सितंबर 2026…

4 hours ago

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में CJI की एंट्री पर नया दांव, सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश…

5 hours ago

भूमिहीन, मजदूरी और सम्मान: बिहार के गांवों में आज भी क्यों कायम है वामपंथ की पकड़?

बिहार में वामपंथ सिर्फ एक चुनावी ताकत नहीं है, बल्कि यह जमीन, मजदूरी और सम्मान…

5 hours ago