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Tilbhandeswar Temple में है चमत्कारी शिवलिंग, अहिल्याबाई होलकर भी थी मंदिर की भक्त

Sawan 2025: Tilbhandeswar Temple उज्जैन से 30 किलोमीटर दूर तराना में स्थित है. सावन के महीने में मंदिर में शिवभक्तों की भारी भीड़ है. कहा जाता है कि उज्जैन के महाकाल मंदिर के क्रम में इस मंदिर का भी काफी महत्व है. मंदिर के पीठाध्वीशर एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत मोहन भारती के मुताबिक मंदिर काफी प्राचीन है और इसका जीर्णोद्वार अहिल्या बाई होलकर ने कराया था. यह मंदिर बाबा भोलेनाथ को समर्पित है. तिल भांडेश्वर मंदिर अपनी विशिष्ट वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध है.

तिलभांडेश्वर मंदिर का इतिहास

तिल भांडेश्वर मंदिर ( Tilbhandeswar Temple ) करीब 700 वर्ष पुराना बताया जाता है. कुछ लोग इसे इससे भी प्राचीन बताते हैं. इस मंदिर में चमत्कारी शिवलिंग है जो प्रति वर्ष एक तिल के बराबर बढ़ता रहता है. कहते हैं कि पहले यह शिवलिंग काफी छोटा था लेकिन अब यह हर साल तिल तिल बढ़कर बड़ा हो गया है. शिवलिंग की जलधारी में जल हमेशा रहता है जबकि इसका कोई श्रोत नहीं है फिर भी चमत्कारिक रूप से यह जल शिवलिंग पर गिरता रहता है.

शिवभक्तों का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है तिलभांडेश्वर मंदिर

Tilbhandeshwar Temple प्राचीन समय से ही महत्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं. यहां काफी दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं. सावन माह में तो शिवभक्तों की भीड़ ज्यादा ही हो जाती है, मंदिर में बाहर दर्शन के लिए लंबी लंबी लोगों की कतारें लग जाती हैं. श्रद्धालुओं को शिवलिंग तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं. इस मंदिर की वास्तुकला प्राचीन भारतीय शैली की है जो इसको खास बनाती है. सावन के सोमवार में यहां की रौनक देखने वाली होती है.

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अहिल्याबाई ने Tilbhandeswar Temple का कराया था जीर्णोद्वार

इंदौर मालवा की महारानी अहिल्याबाई शिवभक्त थीं. उन्होंने कई शिव मंदिरों का जीर्णोद्वार कराया जिनमें सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और तराना का Tilbhandeswar Temple मुख्य हैं. इंदौर की महारानी अहिल्याबाई ने सन 1727 में Tilbhandeswar Temple का जीर्णोद्वार कराया था. मंदिर परिसर में एक विशाल कुंड भी बनवाया था . महारानी अहिल्याबाई ने तत्कालीन मंदिर के पीठाध्वीशर एवं जूना अखाड़े के महंत देवानंद भारती को 16 हेक्टेयर से अधिक जमीन दी थी जिससे मंदिर की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल सकें. अहिल्याबाई द्वारा जीर्णोद्वार कराए जाने से संबंधित एक शिलालेख भी मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगा हुआ हैं. यह मंदिर ऊपर से जितना छोटा लगता है, अन्दर से उतना ही गहरा है. यहां शिवलिंग के दर्शन के लिए भक्तों को सीढियों से उतरना पड़ता है. नीचे पहुंचकर लगता है जैसे बाबा भोलेनाथ की गुफा में आ गए हैं.

Tilbhandeswar Temple में सावन माह में हुई महादेव की विशेष पूजा

प्राचीन समय से ही तिलभांडेश्वर मंदिर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अधिपत्य में रहा है. वर्तमान में इस मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत मोहन भारती हैं. उनके साथ जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत ओम भारती भी मंदिर के संचालन और धार्मिक कार्यों में सहयोग कर रहे हैं. महंत ओम भारती ने बताया कि पीठाधीश्वर श्रीमहंत मोहन भारती ने सावन महीने में तिलभांडेश्वर महादेव की विशेष पूजा अर्चना की है जिससे देश में सुख समृद्धि का वातावरण बने और शिवभक्तों की मनोकामना पूरी हों.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी कर चुके हैं तिलभांडेश्वर मंदिर की पूजा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी कुछ समय पूर्व तराना के तिल भांडेश्वर मंदिर ( Tilbhandeshwar Temple ) आए थे और शिवलिंग का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की थी. इसके बाद श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि और श्रीमहंत मोहन भारती  के साथ मंदिर के विकास के लिए वार्ता की थी जिसके क्रम में उन्होंने कहा था कि प्राचीन धरोहर Tilbhandeswar Temple को काफी भव्य बनाया जाएगा. मध्य प्रदेश सरकार आजकल उज्जैन को धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित कर रही है. तराना का शिव मंदिर उज्जैन का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है. इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा था कि संत ही सनातन का वाहक है. सनातन धर्म ऋषियों मुनियों, संतों के मार्गदर्शन से ही कार्य करता रहा है.

तिलभांडेश्वर मंदिर( Tilbhandeswar Temple ) परिसर में जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरगिरि महाराज कई क्षतिग्रस्त हो चुके मंदिर के भवनों का जीर्णोद्वार करा रहे हैं और अहिल्याबाई द्वारा निर्मित कुंड के पास भी लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर एक जाल बिछाया जा रहा है जिससे लोग सुरक्षित रहें. क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक कई बार बारिश के मौसम में कुंड पूरी तरीके से जलमग्न हो जाता है जिसके कारण अनजाने में कई हादसे हो चुके हैं. श्रीमहंत मोहन भारती ने बताया कि इन्हीं हादसों को रोकने के लिए जूना अखाड़ा जनहित में जाल बिछाने का कार्य शुरू कर रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस 

 

सुशील कुमार तिवारी

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