सोना खरीदारी पर एक्सपर्ट का राय
Gold Silver Price Today: बीते कुछ समय से सोने के दामों में उतार-चढ़ाव देखकर निवेशकों की चिंता थोड़ी बढ़ गई है. साल की शुरुआत में जब गोल्ड ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी, तब से इसकी चाल में थोड़ी सुस्ती जरूर आई है. हालांकि, बाजार के बड़े जानकारों का नजरिया अब भी काफी पॉजिटिव बना हुआ है. गोल्डमैन सैश के ग्लोबल हेड ऑफ मेटल्स ट्रेडिंग, टोनी किम का साफ कहना है कि सोने की कीमतों में दिख रही यह गिरावट महज एक अस्थाई ठहराव है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सोने का बुल रन खत्म हो चुका है. अगर आप भी गोल्ड में पैसे लगाने का मन बना रहे हैं तो मौजूदा बाजार की चाल को गहराई से समझना आपके लिए बहुत जरूरी है.
गोल्ड के दामों में आई इस सुस्ती के पीछे कुछ बड़े ग्लोबल कारण जिम्मेदार हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नई नीतियों को लेकर बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. नए चेयरमैन केविन वॉर्श के महंगाई पर लगाम कसने के तरीकों को लेकर निवेशक अभी सतर्क रुख अपना रहे हैं.
इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने भी ग्लोबल मार्केट पर असर डाला है. इसका सीधा असर 1 सितंबर को देखने को मिला, जब ट्रेजरी यील्ड में उछाल आने के कारण हाजिर सोना 2.4 प्रतिशत लुढ़ककर 4,342.20 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं हालिया अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है.
अगर लॉन्ग टर्म के नजरिए से देखें तो सोने का भविष्य काफी मजबूत दिखाई दे रहा है. टोनी किम के मुताबिक, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक लगातार सोने का अपना भंडार तेजी से बढ़ा रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से इस ट्रेंड में जबरदस्त तेजी आई है. पहले जहां केंद्रीय बैंक सालभर में 400 से 500 टन सोना खरीदते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 1000 से 1100 टन तक पहुंच गया है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं. साल 2025 में केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था, और 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 345 टन सोने की खरीदारी हो चुकी है. जब बैंक इतना भारी सोना खरीदेंगे, तो आम बाजार में इसकी उपलब्धता कम होगी, जिससे आने वाले समय में कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है.
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भारत जैसे एशियाई बाजारों में हाल के दिनों में सोने की मांग थोड़ी धीमी पड़ी है, जिसकी बड़ी वजह ऊर्जा संकट है. अमेरिका-ईरान तनाव के चलते ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने कई देशों को अपनी करेंसी बचाने पर मजबूर किया है, और भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं. जब तक एनर्जी मार्केट पूरी तरह सामान्य नहीं होता, तब तक एशियाई मांग में वैसी तेजी लौटना मुश्किल है.
वहीं अगर आप सोने के साथ चांदी में भी हाथ आजमाने की सोच रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स थोड़ा संभलकर चलने की सलाह देते हैं. चांदी का बाजार सोने के मुकाबले काफी छोटा है और इसकी आधी से ज्यादा मांग औद्योगिक सेक्टर से आती है, जिसके कारण इसमें उतार-चढ़ाव बहुत तेज होता है. निवेशकों के लिए 4,000 डॉलर का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है. ऐसे में यदि कीमतें इस दायरे के आसपास आती हैं, तो लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करने का यह एक शानदार मौका साबित हो सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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