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ठंड में अबतक नहीं बढ़े प्याज के दाम! कैसे आपकी जेब को संभाले रखी है ‘कांदा एक्सप्रेस’?

हर साल सर्दी के बढ़ने के साथ-साथ प्याज के दाम रसोई का बजट बिगाड़ने लगते हैं, जिससे आम आदमी की थाली महंगी हो जाती है. लेकिन इस बार हालात इससे अलग रहे, जिसकी वजह बनी कांदा एक्सप्रेस. इसने महाराष्ट्र से देश के सबी हिस्सों में पहुंचाया, जिसने पूरे बाजार की स्थिरता को संभाले रखा.

ट्रेनों से पहुंचा प्याज

दरअसल, सरकार ने इस बार सड़क के बजाय रेल मार्ग पर भरोसा कर महाराष्ट्र से देश के अलग-अलग हिस्सों तक ट्रेनों के जरिए बड़े पैमाने पर प्याज भेजा. उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे के मुताबिक, इस कदम से बाजार में अचानक कमी नहीं आई और कीमते नियंत्रित रहीं.

बता दें कि सरकारी बफर स्टॉक से 85,719 टन प्याज कांदा एक्सप्रेस के जरिए दक्षिण, पूर्व और उत्तर भारत के बाजारों तक पहुंचाया गया. 2024 में जहां सिर्फ 11,798 टन प्याज ट्रेन से भेजा गया था, वहीं इस साल ये आंकड़ा करीब सात गुना रहा.

कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट

बता दें कि रेलवे के एक रैक में करीब 800 से 900 टन प्याज लोड किया जाता है, जो लगभग 30 ट्रकों के बराबर होता है. लेकिन इस बार रैक की संख्या को 14 से बढ़ाकर 86 कर दी गई. वहीं, जहां पहले सिर्फ 5 शहरों तक सप्लाई सीमित थी, अब 16 बड़े शहरों तक कांदा एक्सप्रेस पहुंच रही है. नतीजा यह हुआ कि जिन इलाकों में आमतौर पर नवंबर में दाम उछलते थे, वहां भी राहत बनी रही.

साथ ही, समय पर सप्लाई का असर सीधे कीमतों पर दिखा. सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई 2025 से प्याज की खुदरा महंगाई दर नकारात्मक बनी हुई है. वहीं, नवंबर 2025 में प्याज के दाम पिछले साल की तुलना में 55 फीसदी से ज्यादा कम दर्ज किए गए. अधिकारियों का कहना है कि बफर स्टॉक और ट्रेनों के सही इस्तेमाल ने इस बार महंगाई की आग बुझा दी.

बंपर पैदावार ने भी दिया साथ

कीमतें गिरने की एक बड़ी वजह उत्पादन में बढ़ोतरी भी रही, जहां वर्ष 2024-25 में प्याज का उत्पादन 27 फीसदी बढ़कर 30.78 मिलियन टन तक पहुंच गया. ज्यादा रकबे में बुवाई और अच्छी पैदावार ने बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया.

दिल्ली-NCR में 19 रुपये किलो प्याज

आम लोगों तक सीधी राहत पहुंचाने के लिए NCCF और NAFED ने किसानों से 3 लाख टन प्याज बफर स्टॉक के लिए खरीदा. NCCF ने दिल्ली-NCR में 19 रुपये किलो की दर से प्याज की खुदरा बिक्री शुरू की, जबकि खुले बाजार में दाम 25 से 35 रुपये किलो तक थे. सितंबर से दिसंबर के बीच दो लाख टन से ज्यादा प्याज उन इलाकों में भेजा गया, जहां कीमतें ज्यादा थीं.

इसके अलावा, घरेलू बाजार संभालने के बाद सरकार ने निर्यात को भी रफ्तार दी. 20 फीसदी निर्यात शुल्क हटने के बाद अप्रैल से सितंबर 2025-26 के बीच 0.72 मिलियन टन प्याज विदेश भेजा गया, जो पिछले साल से करीब 80 फीसदी ज्यादा है. भारत बांग्लादेश, मलेशिया, यूएई, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों को प्याज सप्लाई करता है.

ये भी पढ़ें: सिमुलतला रेल हादसा: हावड़ा-दिल्ली रूट ठप, बिहार से राजधानी की दूरी बढ़ी

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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