Settings to Change Before Giving Phone to Children: आज के डिजिटल दौर में बच्चे फोन पर ऑनलाइन क्लास, प्रोजेक्ट या मनोरंजन के लिए घंटों बिताते हैं. लेकिन माता-पिता के लिए यह सहूलियत चिंता का सबब भी बन जाता है. सेल्सफोर्स सर्वे के मुताबिक, भारत में 73% लोग AI इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें जेन-जी की हिस्सेदारी 65% है. डीपफेक और फेक न्यूज जैसे भी खतरे(Child Digital Safety) लगातार बढ़ रहे हैं. वहीं बता दें कि अमेरिका में तो एक 14 साल के बच्चे ने AI चैटबॉट से बात करने के बाद सुसाइड कर लिया था. ऐसे में आपको फोन की सेटिंग्स बदलना जरूरी है. आईए जानते हैं वो 5 सेटिंग्स जिससे आपका बच्चा सुरक्षित रहेगा.
यूट्यूब बच्चों का सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म है. यहां सबसे ज्यादा जोखिम होता है. अगर बच्चा आपके फोन पर यूट्यूब देखता है तो ऐप में फैमिली सेंटर खोलकर बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बना दें. अगर उनका अपना डिवाइस है तो गूगल फैमिली लिंक से सर्च और रिकमेंडेशन ब्लॉक कर दें. 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इसे कड़ाई से लागू करें. इससे आपत्तिजनक वीडियो और चैनल फीड में नहीं आएंगे.
इंस्टाग्राम पर सुपरविजन मोड बहुत कारगर है. प्रोफाइल मेन्यू में सुपरविजन फॉर टीन्स चुनें. बच्चे के फोन पर अप्रूवल करवाएं.इससे तय कर सकते हैं कि बच्चा किस तरह के AI कैरेक्टर से बात कर सकता है. बता दें कि कुछ खास कीवर्ड ब्लॉक करने से वैसा कंटेंट फीड में नहीं आएगा. यह मोड बच्चे की एक्टिविटी पर नजर रखता है.
बच्चे स्कूल वर्क के लिए आजकल ChatGPT और Google Gemini जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल करने लगे हैं. जिसके चलते इसमें भी बच्चे की सुरक्षा से लेकर सवाल उठने लाजमी है. इससे बचने के लिए आप AI के इन टूल्स पर ये सेटिंग्स लगा सकते हैं:
इससे पता चलेगा कि बच्चा क्या पूछ रहा है और क्या जवाब मिल रहा है.
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फोन में बिल्ट-इन स्क्रीन टाइम फीचर इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इसके लिए iPhone में स्क्रीन टाइम और Android में डिजिटल वेलबीइंग ऑन करें. रोजाना ऐप यूज की लिमिट सेट करते हुए सोशल मीडिया और गेम्स पर टाइमर लगाएं. अनलॉक पासकोड माता-पिता के पास रखें. इससे बच्चा ज्यादा समय बर्बाद नहीं करेगा. बता दें कि इससे गंदे कंटेंट में समय बिताने की गुंजाइश कम होगी.
कई बार बिल्ट-इन सेटिंग्स काफी नहीं होतीं. Net Nanny जैसे ऐप्स वेबसाइट और सोशल मीडिया पर कंटेंट फिल्टर करते हैं. Canopy ऐप AI से फोटो और टेक्स्ट में छिपे गंदे कंटेंट को ब्लॉक करता है. Qustodio से ब्राउजिंग हिस्ट्री और स्क्रीन टाइम ट्रैक करें. ये ऐप्स बैकग्राउंड में काम करते हैं. संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट सीधे माता-पिता को भेजते हैं. इनकी मदद से बच्चा पूरी तरह सुरक्षित रह सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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