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आज से बदल जाएगा आपका WhatsApp; सिम कार्ड नहीं तो चैटिंग नहीं, जानिए क्या है नया ‘सिम-बाइंडिंग’ नियम

WhatsApp SIM Binding: अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो एक नंबर से चार अलग-अलग डिवाइस पर धड़ल्ले से WhatsApp चलाते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ा झटका हो सकती है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अब मैसेजिंग ऐप्स के लिए ‘सिम-बाइंडिंग’ (SIM-Binding) के नियम अनिवार्य होंगे. सरल भाषा में कहें तो, जिस सिम कार्ड पर आपका अकाउंट बना है, उसका फोन में एक्टिव रहना अब जरूरी होगा.

क्या है सरकार का इरादा?

दूरसंचार विभाग (DoT) का यह फैसला डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है. हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयानों से यह संकेत मिले हैं कि सरकार सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है. 1 मार्च की समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त दिख रही है. इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी सिम कार्ड्स के जरिए होने वाले ऑनलाइन फ्रॉड, स्कैम और फेक प्रोफाइल्स पर लगाम लगाना है.

आखिर आपकी लाइफ पर क्या होगा असर?

अभी तक हम क्या करते हैं? एक फोन में सिम है, लेकिन हम WhatsApp Web या ‘लिंक्ड डिवाइस’ फीचर के जरिए उसे लैपटॉप या दूसरे फोन पर हफ्तों तक चलाते रहते हैं. लेकिन नए नियमों के बाद खेल बदल जाएगा:

एक्टिव सिम की शर्त: अगर आपने फोन से सिम निकाल दी, तो आपका WhatsApp चलना तुरंत बंद हो सकता है.

बार-बार वेरिफिकेशन: WhatsApp Web इस्तेमाल करने वालों को अब हर कुछ घंटों में (संभवतः हर 6 घंटे में) दोबारा QR कोड स्कैन करना पड़ सकता है.

मल्टी-डिवाइस पर कैंची: एक ही नंबर को कई जगह चलाने की आजादी अब सीमित हो सकती है.

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कौन होगा सबसे ज्यादा परेशान?

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा. भारत में लाखों छोटे बिजनेस WhatsApp के जरिए ही चलते हैं, जहाँ एक ही नंबर को टीम के कई सदस्य अलग-अलग सिस्टम पर लॉगिन करके रखते हैं. जानकारों का मानना है कि इससे उनके कामकाज में 60 से 80 प्रतिशत तक की गिरावट या तकनीकी बाधा आ सकती है.

टेक कंपनियों और सरकार के बीच खींचतान

सिर्फ WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram और Signal जैसे ऐप्स भी इस नियम के दायरे में आएंगे. हालांकि, कई टेक कंपनियां इसे ‘प्राइवेसी’ और ‘यूजर एक्सपीरियंस’ के खिलाफ बता रही हैं, लेकिन सरकार का तर्क सीधा है “सुरक्षा पहले”. अगर हर अकाउंट एक एक्टिव सिम से जुड़ा होगा, तो साइबर अपराधियों को ट्रैक करना पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए बहुत आसान हो जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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