प्रतीकात्मक फोटो.
संस्कार भारती के “कला संकुल” परिसर में रविवार (26 अक्टूबर 2025) को विचार एवं रचनात्मकता पर आधारित नाट्य समीक्षा संगोष्ठी का आयोजन हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसमें कला संकुल के संयोजक अशोक तिवारी, मुख्य अतिथि राजेश जैन “चेतन”, नाटक के लेखक एवं निर्देशक जे.पी. सिंह तथा वरिष्ठ रंगकर्मी अवतार साहनी उपस्थित रहे.
इस अवसर पर रंगभूमि दिल्ली द्वारा मंचित नाटक “युगपुरुष” की समीक्षा की गई. यह नाटक रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित है — उस कालखंड की कथा जब नरेंद्र अभी विवेकानंद नहीं बने थे, किंतु आत्मबोध और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर हो रहे थे.
समीक्षा से पूर्व नाटक की कुछ प्रभावशाली झलकियाँ प्रदर्शित की गईं. तत्पश्चात मंच पर नाटक के निर्देशक जे.पी. सिंह, रामकृष्ण परमहंस की भूमिका निभाने वाले विपिन कुमार, स्वामी विवेकानंद की भूमिका निभाने वाले सुधीर रिखारी तथा मुख्य अतिथि राजेश जैन “चेतन” उपस्थित रहे.
कार्यक्रम के दौरान राजेश जैन ने अपनी एक अत्यंत सुंदर कविता का पाठ किया, जिसने “युगपुरुष” की आत्मिक गहराई को दर्शकों तक सजीव रूप से पहुंचाया. चर्चा सत्र में कलाकारों से यह जानने का प्रयास किया गया कि इतने महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक चरित्रों को निभाने के लिए उन्होंने किन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया और इन पात्रों को आत्मसात करने की प्रक्रिया में उन्होंने अपने भीतर क्या परिवर्तन अनुभव किए.
समीक्षा के पश्चात सुधीर रिखारी ने अपनी मधुर आवाज़ में एक भजन प्रस्तुति दी, जिसने वातावरण को भावनात्मक और आध्यात्मिक माधुर्य से भर दिया. उनके भजन ने नाटक की विषयवस्तु को मानो नए रूप में जीवंत कर दिया और सभा में एक गहन शांति और श्रद्धा का भाव छा गया.
नाटक के अन्य कलाकारों में अरुण सोंधे, त्रिप्ती जौहरी, शुद्धो बनर्जी, गौरव वर्मा, मुकेश और हरी सिंह खोलीया शामिल रहे. सभी कलाकारों को कला संकुल परिवार की ओर से अंगवस्त्र और पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया.
इस आयोजन को सफल बनाने में अनेक समर्पित कार्यकर्ताओं का योगदान रहा, जिनमें विशेष रूप से संयोजिका भारती डांग का नाम उल्लेखनीय है, जिन्होंने अत्यंत सुरुचिपूर्ण ढंग से मंच संचालन किया. साथ ही श्रुति सिन्हा, गरिमा रानी, स्नेहा मुखर्जी, श्याम कुमार, राज उपाध्याय, श्राबोनी साहा और हर्षित गोयल के समर्पण और सक्रिय सहयोग से कार्यक्रम को विशेष सफलता मिली.
संपूर्ण आयोजन में कला संकुल परिवार की समर्पित टीम भावना स्पष्ट रूप से झलकती रही, जिसने यह सिद्ध किया कि संस्कार भारती केवल कला का मंच नहीं, बल्कि भारतीयता और संवेदना का सशक्त प्रवाह है.
-भारत एक्सप्रेस
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