आगरा में ताजमहल से 12 किलोमीटर दूर स्वामी बाग समाधि
आगरा ताजमहल के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जिसे देखने रोज हजारों लोग आते हैं. लेकिन आगरा में केवल ताजमहल नहीं है, बल्कि यहां एक और ऐसी भव्य और अलौकिक सफेद संगमरमर की इमारत बनकर पूरी तरह निखर चुकी है, जिसकी खूबसूरती को देखकर देशी-विदेशी पर्यटक दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं. हम बात कर रहे हैं आगरा के दयालबाग क्षेत्र में स्थित ‘स्वामी बाग समाधि’ (Soami Bagh Samadhii) की.
राधास्वामी मत के संस्थापक परम पुरुष पूरन धानी हुजूर स्वामीजी महाराज के इस पावन समाधिि स्थल की भव्यता ऐसी है कि लोग अब इसकी तुलना दुनिया के अजूबों में शुमार मुगलों के ताजमहल से करने लगे हैं. जहां ताजमहल को बनने में करीब 22 साल का समय लगा था, वहीं इस दिव्य स्मारक के बारीक नक्काशीदार ढांचे को इस स्वरूप में लाने के लिए पीढ़ियों की मेहनत लगी है.
इस भव्य आध्यात्मिक केंद्र की नींव आज से एक शताब्दी से भी पहले यानी साल 1904 में रखी गई थी. इसके बाद से लगातार इसके पत्थरों को तराशने और जोड़ने का काम अनवरत चलता रहा. बारीक नक्काशी, बेजोड़ नक्काशीदार पिलर, मेहराबों और विशाल गुंबद को पूरी सटीकता से तैयार करने में शिल्पकारों को एक सदी से भी अधिक का समय लगा. लगभग 120 साल के इस लंबे और ऐतिहासिक सफर के बाद, यह संगमरमर की अनूठी धरोहर अब अपने मुकम्मल और भव्य रूप में पूरी तरह सजकर देश और दुनिया के आध्यात्मिक पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है.
वास्तुकला और इंजीनियरिंग के लिहाज से स्वामी बाग समाधि बेहद बेजोड़ है. करीब 50 से 60 फीट की गहराई तक जमीन के अंदर विशेष पत्थरों को डालकर मजबूत पिलर खड़े किए गए हैं. ताजमहल की ही तरह इस भव्य इमारत को भी ’52 कुओं की मजबूत नींव’ पर खड़ा किया गया है, ताकि इसके ऊपर बन रहे विशाल गुंबद पर किसी भी बड़े भूकंप या तेज आंधी-तूफान का कोई असर न पड़े. राजस्थान के मकराना से मंगाए गए बेहतरीन सफेद संगमरमर से बने इस भव्य स्मारक की कुल ऊंचाई 193 फीट है. दिलचस्प बात यह है कि इस समाधि के ऊपर लगा कलश ऊंचाई के मामले में ताजमहल के कलश से भी थोड़ा ऊंचा है.
इस इमारत को ‘बाग’ की संज्ञा दी गई है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वर्ग में चारों तरफ असीम शांति, हरियाली और संपन्नता होती है. यही वजह है कि इसके भव्य संगमरमर के खंभों, विशाल द्वारों, छतों और दीवारों पर की गई पच्चीकारी (Inlay Work) में विभिन्न प्रकार के फल, फूल और लताओं को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि वे बिल्कुल सजीव और प्राकृतिक नजर आते हैं. इस कलाकृति को देखने के लिए हर दिन सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु और कला प्रेमी यहां पहुंचते हैं.
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हुआ स्वामी बाग समाधि केवल अपनी खूबसूरत नक्काशी के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और वैश्विक शांति के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है. राधास्वामी मत की इस पावन स्थली पर किसी भी जाति, धर्म या संप्रदाय का व्यक्ति आकर मानसिक शांति प्राप्त कर सकता है और दैनिक सत्संग का हिस्सा बन सकता है. आगरा आने वाले सैलानियों के लिए अब ताजमहल और लाल किले के दीदार के साथ-साथ दयालबाग के इस सफेद संगमरमर के अजूबे को देखना एक बेहद खास और न भूलने वाला अनुभव बनता जा रहा है.
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