उत्तर प्रदेश

‘जब कांवड़ यात्रा निकल सकती है, तो 15 मिनट नमाज क्यों नहीं?’ अलीगढ़ में AIMIM ने दी सड़क पर नमाज पढ़ने की चेतावनी

रिपोर्ट- प्रकाश सिंह


उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक बार फिर धार्मिक आयोजनों और सड़क के इस्तेमाल को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के कार्यकर्ताओं ने इस बार सीधे जिला प्रशासन के सामने एक ऐसी मांग रख दी है, जिसने शहर में नई बहस छेड़ दी है. AIMIM कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने सड़क पर नमाज पढ़ने की इजाजत मांगी है.

यह ज्ञापन अतिरिक्त नगर मजिस्ट्रेट (ACM) को सौंपा गया है. इसमें सिर्फ नमाज की इजाजत ही नहीं, बल्कि नमाजियों के लिए पानी, बिजली और साफ-सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की भी मांग की गई है.

ओवैसी की पार्टी ने पूछा सवाल

ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बात करते हुए AIMIM के जिला अध्यक्ष यामीन अब्बासी ने प्रशासन और सरकार की नीतियों पर जमकर भड़ास निकाली. उन्होंने सीधे तौर पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जब दूसरे धर्मों के लोगों को सड़कों पर बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन करने की खुली छूट मिलती है, तो फिर मुसलमानों को सड़क पर नमाज पढ़ने से क्यों रोका जाता है?

यामीन अब्बासी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नारे को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा:

“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की बात करते हैं, लेकिन जमीन पर ऐसा दिखता नहीं है. जब सड़कों को पूरी तरह रोककर कांवड़ यात्रा निकाली जा सकती है, तो फिर सिर्फ 15 मिनट के लिए सड़क पर नमाज क्यों नहीं पढ़ी जा सकती? क्या हमारे लिए नियम अलग हैं?”

‘अनुमति नहीं मिली, तो पिछली बार की तरह…’

बात सिर्फ मांग तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि AIMIM नेता ने प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी भी दे डाली. अब्बासी ने कहा कि अगर प्रशासन उन्हें सड़क पर नमाज पढ़ने की आधिकारिक अनुमति नहीं देता है, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि इजाजत न मिलने की सूरत में भी पिछली बार की तरह ही इस बार भी चुपचाप सड़क पर नमाज अदा की जाएगी.

प्रशासन के सामने खड़ी हुई चुनौती

AIMIM के इस कड़े रुख और खुले अल्टीमेटम ने अलीगढ़ जिला प्रशासन के सामने एक बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है. उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय से सड़कों पर किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन या यातायात बाधित करने वाली गतिविधियों पर सख्त पाबंदी है. ऐसे में प्रशासन के लिए एक तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखना और दूसरी तरफ इस राजनीतिक और धार्मिक घमासान को शांत करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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