Babri Masjid Demolition Anv: अयोध्या में बाबरी ढांचे के विध्वंस की 32वीं बरसी पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पहुंचे. उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई और मन्नत का धागा बांधा. उनके साथ पत्नी व करहल की सांसद डिंपल यादव और राज्यसभा सांसद जया बच्चन भी थीं.
अखिलेश यादव का यह दौरा राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी. अखिलेश ने कहा कि यह जगह शांति और एकता का प्रतीक है. हम यहां प्रार्थना करने आए हैं ताकि सबके बीच भाईचारा बना रहे.
अखिलेश का यह दौरा आगामी चुनावी माहौल में सपा की रणनीति का हिस्सा लगता है. दरगाह पहुंचने पर उन्होंने याद किया कि 2012 में उन्होंने यहां मन्नत मांगी थी, जो पूरी हुई. उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साकार करते हुए कहा कि इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन जैसी समस्याएं उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने से हो रही हैं. वोट कटने की चिंता पर हंसते हुए बोले, एसआईआर के जरिए वोट बचाना है, न कि बढ़ाना.
इस संवेदनशील तारीख पर अखिलेश के आगरा दौरे ने उनके पिता व सपा संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के उस ऐतिहासिक फैसले को फिर याद दिला दिया. 1990 में मुख्यमंत्री मुलायम ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद की ओर बढ़ते कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था. 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को हुई फायरिंग में सैकड़ों कारसेवक मारे गए थे. मुलायम ने कहा था, ‘बाबरी मस्जिद पर एक परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा.’
9 वर्ष पहले मुलायम सिंह जब खुद पर लिखी गई एक पुस्तक का विमोचन करने लखनऊ के इंदिरा गांधी सस्थान में आए थे. तब उन्होंने कहा-
“अयोध्या कांड में गोली चलवाने से मेरी बहुत आलोचना हुई. लेकिन देश की एक मस्जिद बचाने के लिए यह जरूरी था. यदि उस समय गोली नहीं चलती तो मुसलमानों का विश्वास देश से उठ जाता. इसके लिए मुझे गोलियां चलवानी पड़ीं. अगर मस्जिद को बचाने में और भी जान जातीं, तब भी मैं पीछे नहीं हटता. उस समय संसद में जाने पर मुझे मानवता का हत्यारा कहा जाता था.”
इस घटना ने उन्हें ‘मुल्ला मुलायम’ का उपनाम दिया, लेकिन मुस्लिम वोट बैंक मजबूत किया. कई साल बाद 2016 में एक सभा में मुलायम ने हंसते हुए कबूला, ‘उस समय मंदिर-मस्जिद और देश की एकता का सवाल था. मैंने गोली चलवाने का फैसला लिया, क्योंकि भीड़ बेकाबू हो गई थी. इस पर हमें कोई पछतावा नहीं है.’
अखिलेश ने इस दौरान मुलायम की विरासत का जिक्र किया और कहा कि नेताजी ने हमेशा शांति चुनी. यह दौरा सपा के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देता है.
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