Dava karobaar : आगरा में नकली दवाओं और उनके गोदामों पर हुई बड़ी कार्रवाई के बाद सामने आया कि इस धंधे का नेटवर्क सिर्फ ताजनगरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है. औषधि विभाग ने आगरा से पकड़ी गई फर्मों के कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है.
उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों को अलर्ट जारी कर दिया गया है. विभाग ने संबंधित जिलों से दवाई फर्मों की खरीद-फरोख्त की जानकारी मांगी है, ताकि पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया जा सके. औषधि विभाग को अंदेशा है कि आगरा से बनी नकली दवाइयां प्रदेश के अन्य जनपदों में बड़े पैमाने पर भेजी गई थीं और मेडिकल स्टोर यह नकली दवाइयां अभी भी बेच रहे होंगे जिससे बीमार व्यक्ति के लिए इसका सेवन काफी नुकसानदायक हो सकता है. उसका ठीक होना तो दूर बल्कि वह किसी नई बीमारी से ग्रसित भी हो सकता है.
आगरा निवासी हरीश के मुताबिक आगरा के कई मेडिकल स्टोर दवाइयों पर 50 फीसदी तक रियायत तक देते थे, अब उनको लग रहा है कि इन नकली दवाइयां पर ही इतनी छूट मिल सकती है.
22 से 31 अगस्त तक एसटीएफ और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर पांच फर्मों को नकली दवाओं की खरीद-फरोख्त में संलिप्त पाया. इनमें हे मां मेडिको, बंसल मेडिकल एजेंसी, ताज मेडिको, एमएसवी मेडि प्वाइंट और श्री राधे मेडिकल एजेंसी शामिल थीं. छानबीन में हे मां मेडिको के संचालक हिमांशु अग्रवाल को एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने के आरोप में जेल भेजा गया, जबकि बंसल मेडिकल एजेंसी के मालिक संजय बंसल, उनके पुत्र और भाई को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. बरामद बिलों से स्पष्ट हुआ कि इन फर्मों से दवाइयां बरेली, लखनऊ सहित कई जिलों में बेची गई थीं.
जांच में यह भी सामने आया कि नकली दवाओं का बड़ा हिस्सा चेन्नई और पुडुचेरी से बनकर आता था। मीनाक्षी फार्मा (पुडुचेरी) और अमान फार्मा (चेन्नई) नामक फर्मों से दवाइयां लखनऊ के कारोबारी बंधुओं की फर्मों के नाम पर भेजी जाती थीं. बिल इन्हीं के नाम पर बनाए जाते थे, जबकि असल डिलीवरी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में की जाती थी. चेन्नई में छापेमारी भी हुई, मगर अब तक वहां के सौदागर पुलिस की पकड़ से दूर हैं.
आगरा मंडल सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि आगरा में पकड़ी गई फर्मों की जानकारी सभी मंडलों के सहायक औषधि आयुक्तों को भेजी गई है. उनसे अपेक्षा की गई है कि वे बाजार में इन फर्मों की दवाइयों की जांच कर रिपोर्ट भेजें. इस संबंध में लखनऊ मुख्यालय को भी सूचना दी गई है. औषधि विभाग का मानना है कि नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए मंडल स्तर पर सघन जांच और समन्वय बेहद जरूरी है.
भारत एक्सप्रेस
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