Prayagraj Division Solar Coach: प्रयागराज/अनम फातिमा: भारतीय रेल लगातार आधुनिकीकरण और ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. इसी कड़ी में, उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने एक शानदार और पर्यावरण-अनुकूल पहल करते हुए देश का पहला ‘सोलर-असिस्टेड यात्री कोच’ लॉन्च किया है. इस विशेष कोच की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो सूरज की रोशनी से बिजली बनाकर ट्रेन के पंखे, लाइट और आपके मोबाइल को चार्ज करेंगे.
परंपरागत रूप से, ICF यात्री कोचों में बिजली का उत्पादन कोच के नीचे लगे ‘एक्सल-ड्रिवन अल्टरनेटर’ के माध्यम से होता है. यह ट्रेन के पहियों की गति पर निर्भर करता है और इससे बैटरी चार्ज होती है. लेकिन, इस नए पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक नॉन-एसी कोच की छत पर 21 उच्च दक्षता वाले सोलर फोटोवोल्टिक पैनल (करीब 7 किलोवाट-पीक क्षमता) लगाए गए हैं. अब दिन के समय सूरज की रोशनी से सीधे स्वच्छ बिजली बनेगी और कोच का बैटरी बैंक चार्ज होगा, जिससे ट्रेन की गति पर निर्भरता खत्म हो जाएगी.
एनसीआर के सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा और चीफ इंजीनियर पुलकित श्रीवास्तव ने बताया कि यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक बड़ा कदम है. इस सोलर सिस्टम के जरिए:
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इस तकनीक को रेलवे ने अपने ही संसाधनों का इस्तेमाल करके बड़ी आसानी से तैयार किया है. सोलर पैनल सीधे छत पर लगाए गए हैं, जिससे अलग से कोई ढांचा नहीं बनाना पड़ा. डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा. झांसी (Jhansi) स्थित नॉर्दर्न रेलवे की रेल कोच रेनोवेशन फैक्ट्री और सीएमएलआर वर्कशॉप को लक्ष्य दिया गया है कि वे हर महीने कम से कम 2 ऐसे सोलर कोच तैयार करें. जैसे-जैसे ये कोच तैयार होंगे, उन्हें पटरियों पर उतारा जाएगा.
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