Kanwar Yatra Viral Couple
Kanwar Yatra Viral Couple: हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद की ओर कांवड़ यात्रा कर रहे संभल निवासी दंपति तमन्ना मलिक और उनके हिंदू पति अमन त्यागी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. मीडिया से बातचीत के दौरान दोनों ने अपनी यात्रा, आपसी रिश्ते और हालिया विवादों पर खुलकर अपनी बात रखी. हिंदू-मुस्लिम विवाह और साथ में कांवड़ यात्रा करने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच दंपति ने कहा कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी धार्मिक आस्था का पालन कर रहे हैं.
अमन त्यागी ने कहा कि उनकी पत्नी उनकी जीवनसंगिनी हैं और विवाह के समय लिए गए सात फेरों के वचनों के अनुसार वे हर परिस्थिति में उनका साथ निभाएंगे. उन्होंने कहा, “यह मेरी पत्नी हैं. हमने सात फेरे लिए हैं. जैसा यह चाहेंगी, मुझे इनके साथ चलना ही है क्योंकि मैंने इनसे वादा किया है.” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कांवड़ यात्रा को लेकर विवाद खड़ा करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि वे किसी तरह का तनाव नहीं फैला रहे, बल्कि पूरी शांति और संविधान के दायरे में अपनी धार्मिक यात्रा कर रहे हैं.
वहीं मौलाना रशीदी द्वारा कांवड़ियों पर दिए गए विवादित बयान पर आपत्ति जताते हुए अमन त्यागी ने कहा, “मौलाना रशीदी ने बयान दिया है कि हरिद्वार से जल लेकर आ रहे भोले शराबी, भंगेड़ी और आतंकवादी हैं. 11 तारीख को जल चढ़ाने से पहले मौलाना रशीदी पर एफआईआर दर्ज हो. अमन ने कहा कि यदि 11 अगस्त को जलाभिषेक से पहले मौलाना रशीदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी नहीं होती, तो जल चढ़ाने के बाद वे विरोध स्वरूप सड़क पर बैठेंगे.
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तमन्ना मलिक ने कहा कि उन्हें किसी भी कट्टरपंथी सोच या धमकियों से डर नहीं लगता. उन्होंने कहा कि वे अपनी आस्था और निर्णय पर कायम हैं. सनातन धर्म में आने के अपने अनुभव साझा करते हुए तमन्ना ने कहा कि उन्हें यहां महिलाओं को सम्मान और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की आजादी महसूस हुई है.mउन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक कट्टरता समाज के लिए ठीक नहीं है और सभी लोगों को एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करना चाहिए.
हिंदू पति और मुस्लिम पृष्ठभूमि से आने वाली पत्नी का एक साथ कांवड़ यात्रा करना सामाजिक और धार्मिक बहस का विषय बन गया है. जहां कुछ लोग इसे आपसी विश्वास और धार्मिक स्वतंत्रता का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं कुछ संगठनों और व्यक्तियों की ओर से इस पर आपत्ति भी जताई जा रही है. हालांकि दंपति का कहना है कि वे अपनी व्यक्तिगत आस्था, वैवाहिक संबंध और संवैधानिक अधिकारों के तहत यह यात्रा कर रहे हैं तथा समाज में शांति और सौहार्द का संदेश देना चाहते हैं.
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