La Nina : उत्तर प्रदेश में इस बार सर्दी का असर सामान्य से अधिक तीखा और लंबा रहने वाला है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा अनुमानों के अनुसार दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक प्रदेश में कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और शीतलहर का लम्बा दौर बने रहने की पूरी संभावना है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति वैश्विक जलवायु पैटर्न ला नीना (La Nina) की सक्रियता के कारण बनेगी, जिसका उत्तर भारत के तापमान पर सीधा असर पड़ता है.
ला नीना एक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्र सतह तापमान सामान्य से कम हो जाता है. इस ठंडे पानी का प्रभाव दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है. विशेषज्ञ बताते हैं कि ला नीना के दौरान उत्तरी भारत में तापमान अधिक तेजी से गिरता है, हवा में नमी बढ़ने से कोहरा घना होता है और पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा सक्रिय रहते हैं, जिसके चलते ठंड के साथ बारिश और ओलावृष्टि की संभावना भी बढ़ जाती है. यह पूरी प्रक्रिया मिलकर सर्दी को सामान्य से ज्यादा लंबे समय तक टिकाए रखती है.
मौसम विभाग का अनुमान है कि दिसंबर के दूसरे सप्ताह से ही यूपी में सर्दी का असर तेजी से बढ़ेगा. पश्चिमी यूपी विशेषकर मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और बरेली में तापमान सबसे पहले गिरेगा, जहां न्यूनतम तापमान 3–5°C तक जा सकता है. इसके बाद पूर्वी यूपी जैसे गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में दिसंबर के अंत तक कड़ाके की ठंड महसूस होने लगेगी. वहीं लखनऊ और कानपुर में तापमान 5–7°C के बीच रह सकता है, जबकि बुंदेलखंड के झांसी, बांदा और महोबा में भी शीतलहर की स्थिति बनने की संभावना है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जनवरी 2026 इस दशक की सबसे ठंडी जनवरी साबित हो सकती है.
इस बार सर्दियों में कोहरा अधिक घना और लंबे समय तक रहने वाला है. दिसंबर के अंत से लेकर जनवरी भर सुबह के समय विजिबिलिटी कई जगहों पर 50–100 मीटर तक सीमित रह सकती है. घने कोहरे की स्थिति कई बार दोपहर तक बनी रह सकती है, जिससे रेल और सड़क परिवहन दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा. कई ट्रेनों के लेट होने और सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ेगी. ट्रैफिक विभाग ने लोगों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और फॉग लाइट के उपयोग की अपील की है.
ला नीना के प्रभाव से बढ़ी ठंड का कृषि पर मिला-जुला असर दिखेगा. जहां कड़ाके की ठंड गेहूं की फसल के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है, वहीं आलू, मटर और सरसों की बढ़वार में भी सुधार होगा. कम तापमान से कीटों का प्रकोप भी घटेगा. इसके विपरीत कई इलाकों में पाला (फ्रॉस्ट) पड़ने की आशंका बढ़ेगी, जो सब्जियों और बागवानी के लिए नुकसानदेह हो सकता है. कृषि वैज्ञानिक किसानों को सलाह दे रहे हैं कि रात के समय हल्की सिंचाई करते रहें और पाले के दिनों में खेतों की विशेष निगरानी करें.
शीतलहर का असर जनजीवन पर भी गहराई से पड़ेगा. ठंड बढ़ने पर स्कूलों में छुट्टियाँ बढ़ सकती हैं, जबकि दफ्तर जाने वाले लोगों को सुबह अधिक ठिठुरन झेलनी पड़ेगी. बच्चे, बुजुर्ग और हृदय रोगियों के लिए यह मौसम अधिक जोखिम भरा रहेगा. ग्रामीण इलाकों में बिजली की खपत बढ़ने से कटौती की समस्या भी सामने आ सकती है. कोहरे और फिसलन के कारण सड़क हादसों की संभावना में भी वृद्धि होगी. स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से ठंड में सतर्क रहने और आवश्यक एहतियात बरतने की सलाह दी है.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जनवरी 2026 में ला नीना अपने चरम पर होगा. इस अवधि में कई जिलों में तापमान 2–4°C तक जा सकता है और लगातार कई दिनों तक शीतलहर बनी रह सकती है. कई बार कोल्ड डे और सीवियर कोल्ड डे घोषित किए जाने की संभावना भी है. घना कोहरा यातायात और दैनिक जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करेगा, जिससे पूरी जनवरी कठिन साबित हो सकती है.
ठंड से बचने के लिए सुबह-शाम पूरी तरह गर्म कपड़ों का उपयोग करें, अदरक, गुड़, मेथी, सूप जैसे गरमाहट देने वाले आहार शामिल करें, बुजुर्ग व हृदय रोगी सुबह मॉर्निंग वॉक से बचें और घर में हीटर या अंगीठी का सुरक्षित उपयोग करें. सफर के दौरान फॉग लाइट और कम गति का पालन करना भी जरूरी है.
भारत एक्सप्रेस
दिल्ली के श्रीराम सेंटर में ‘अमर बलिदान’ नाटक का मंचन हुआ. गुरु तेग बहादुर जी…
Gyanesh Kumar removal impeachment: CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए INDIA ब्लॉक फिर नया…
S Jaishankar UN Speech: संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन…
पीएम मोदी ने वाराणसी से वडनगर जा रही सेवा यात्रा के युवाओं से बातचीत की.…
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 160 SAT-SAAW ग्लाइड बम खरीदने के लिए ₹811…
Cheapest Petrol In World: दुनिया में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग हैं. वेनेजुएला और ईरान जैसे…