उत्तर प्रदेश

मरने के बाद भी आराम नहीं..! मिर्जापुर की मोर्चरी में चूहों ने कुतर डाला जवान युवक का शव, लापरवाही से मचा हड़कंप

रिपोर्ट-अंबुज


Mirzapur Mortuary Incident: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सरकारी सिस्टम और इंसानियत, दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां के मंडलीय अस्पताल की मोर्चरी (मुर्दाघर) में रखे एक युवक के शव को चूहों ने इस कदर कुतरा कि उसकी लाश क्षत-विक्षत हो गई. यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि एक दुखी परिवार की भावनाओं के साथ खिलवाड़ का है, जिसे लेकर अब खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभाल लिया है.अब इस पूरे कांड की रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जा रही है, जिसके बाद कई बड़े चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.

जानिए क्या है पूरा मामला?

यह पूरी कहानी 25 साल के अभिषेक सैनी उर्फ किशन की मौत से शुरू होती है. रविवार शाम को अभिषेक ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी. घर में मातम पसरा था, पुलिस ने पंचनामा भरा और शव को रात में सुरक्षित रखने के लिए मोर्चरी भिजवा दिया. लेकिन असली प्रताड़ना तो अस्पताल में शुरू हुई.

अभिषेक के बड़े भाई राजू ने जो आरोप लगाए हैं, वो किसी का भी खून खौलाने के लिए काफी हैं. राजू का कहना है कि जब वे शव पर चादर डालने अंदर गए, तो वहां भयंकर गर्मी और कीड़े-मकोड़े रेंग रहे थे. जिसको लेकर अस्पताल के कर्मचारियों ने बड़े आराम से कह दिया कि ‘भाई, फ्रीजर खराब है, शव खराब हो जाएगा. अगर सुरक्षित रखना है तो बर्फ मंगवा लो. हद तो तब हो गई जब शोक में डूबे परिवार से बर्फ लगाने के नाम पर कर्मचारियों ने ₹2000 भी ऐंठ लिए.

शब की चादर हटाई तो कांप गई रूह

परिजनों को लगा कि पैसे दे दिए हैं और बर्फ लग गई है तो भाई का शरीर सुरक्षित होगा. लेकिन सोमवार सुबह जब पोस्टमार्टम के लिए चादर हटाई गई, तो वहां का नजारा देख सबकी रूह कांप गई. चूहों या किसी जानवर ने अभिषेक के कमर और हाथ का करीब आधा किलो मांस कुतर कर खा लिया था.

अस्पताल की इस घोर लापरवाही को देख परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में ही जमकर हंगामा किया. पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने जब कार्रवाई का भरोसा दिया, तब कहीं जाकर परिवार पोस्टमार्टम के लिए राजी हुआ.

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जांच अधिकारी के सामने खुली बदहाली की पोल

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच करने पहुंचे डॉ. आरबी कमल ने सिर्फ मोर्चरी ही नहीं, बल्कि इमरजेंसी वार्ड का भी मुआयना किया. वहां भर्ती मरीजों ने भी डॉक्टरों के न मिलने और इलाज में देरी की शिकायतों की झड़ी लगा दी. जांच अधिकारी ने पाया कि मोर्चरी में साफ-सफाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है और सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं. वहीं बता दें कि डॉ. कमल ने पीड़ित परिवार, वहां मौजूद कर्मचारियों और ड्यूटी डॉक्टरों के बयान दर्ज कर लिए हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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