Banke Bihari Temple Controversy: कान्हा की नगरी वृंदावन से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने न केवल बांके बिहारी के भक्तों को आहत किया है, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु नंगे पैर और श्रद्धा भाव से दर्शन के लिए आते हैं, वहां एक पुलिसकर्मी की घोर लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खाकी वर्दी में तैनात एक पुलिसकर्मी बिना किसी झिझक के जूते पहनकर मंदिर परिसर के भीतर घूम रहा है. इस घटना ने मंदिर की पवित्रता और धार्मिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया है.
प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के आधार पर बताया जा रहा है कि यह घटना उस समय हुई जब मंदिर में दर्शनार्थियों की काफी भीड़ थी. ड्यूटी पर तैनात अन्य सुरक्षाकर्मियों और निजी सुरक्षा गार्डों ने जब इस पुलिसकर्मी को जूते पहनकर भीतर जाते देखा, तो उन्होंने उसे टोकने की कोशिश की.
सुरक्षाकर्मियों ने उसे शिष्टाचार के साथ जूते उतारने के लिए कहा, लेकिन आरोप है कि उस पुलिसकर्मी ने सुरक्षाकर्मियों की बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया. वह अपनी वर्दी के रौब में या फिर घोर लापरवाही दिखाते हुए जूतों समेत मंदिर परिसर के प्रतिबंधित हिस्से की ओर बढ़ता रहा. किसी श्रद्धालु ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद अब यह वीडियो प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है.
इस वीडियो के वायरल होते ही ब्रजवासियों और श्रद्धालुओं में नाराजगी की लहर दौड़ गई है. बांके बिहारी मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां की चौखट को चूमने के लिए लोग मीलों का सफर तय करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की अपनी एक मर्यादा और परंपरा है जिसका पालन हर किसी को करना चाहिए. चाहे वह आम नागरिक हो, कोई बड़ा नेता हो या फिर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी. खाकी वर्दी का मतलब नियम तोड़ना नहीं बल्कि नियमों की रक्षा करना होता है. ऐसे में एक पुलिसकर्मी द्वारा ऐसी हरकत करना बेहद शर्मनाक है और इससे मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी सवालिया निशान खड़ा होता है.
घटना के बाद अब हर कोई मथुरा पुलिस और जिला प्रशासन के रुख का इंतजार कर रहा है. सोशल मीडिया पर लोग मांग कर रहे हैं कि आरोपी पुलिसकर्मी की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक स्थल की मर्यादा से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके. मंदिर प्रबंधन ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया है. अब देखना यह होगा कि आस्था को ठेस पहुंचाने वाले इस मामले में शासन क्या कदम उठाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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