UP News: उत्तर प्रदेश की मुस्लिम राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान आखिरकार 23 महीने बाद सीतापुर जेल से बाहर आ रहे हैं. अदालत से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है और अब कोई कानूनी अड़चन नहीं बची है. जैसे ही उनकी जमानत की खबर सामने आई रामपुर समेत पूरे प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई.
आजम खान की रिहाई को लेकर उनके समर्थकों में खुशी की लहर है. वहीं विरोधी खेमा सतर्क हो गया है. रामपुर की राजनीति में कभी आजम का दबदबा था लेकिन उनके जेल जाने के बाद सपा की पकड़ कमजोर पड़ गई थी. रामपुर में सपा का संगठन तो है लेकिन आजम के बिना उसकी चमक फीकी हो गई थी. अब सवाल उठता है कि आजम के बाहर आने के बाद क्या सियासी समीकरण बदलेंगे?
आजम खान को उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में सजा हुई थी. इस केस में आजम खान, उनकी पत्नी तंजीम फातिमा और बेटे को सात-सात साल की सजा मिली थी. तंजीम को सात महीने बाद, अब्दुल्ला को 17 महीने बाद और अब आजम को 23 महीने बाद जमानत मिली है. जेल में रहते हुए आजम पर 100 से ज्यादा केस दर्ज हुए जिनमें जमीन कब्जाने और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले शामिल हैं.
2017 में योगी सरकार के आने के बाद आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई थीं. उन पर एक के बाद एक मुकदमे दर्ज होते गए और उनका पूरा परिवार कानूनी पचड़ों में उलझता चला गया. रामपुर की राजनीति जो कभी आजम के इशारे पर चलती थी अब उनके हाथ से निकल चुकी है. उनके विरोधी भी सपा में मजबूत हो गए हैं. खासकर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी जिन्हें आजम का विरोधी माना जाता है.
अब जब आजम खान बाहर आ रहे हैं तो उनके समर्थक फिर से एक्टिव हो सकते हैं. रामपुर के सपा संगठन में आजम के करीबी लोग हैं जो उनके साथ कदमताल करते नजर आ सकते हैं. आजम का असर सिर्फ रामपुर तक सीमित नहीं है बल्कि मुरादाबाद, संभल और पूरे पश्चिमी यूपी में उनकी पकड़ रही है.
जेल में रहते हुए आजम ने पत्रों के माध्यम से सपा और कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. उन्होंने इंडिया गठबंधन पर मुस्लिमों की अनदेखी का आरोप भी लगाया था. ऐसे में यह चर्चा तेज है कि क्या आजम सपा से दूरी बना लेंगे? अखिलेश यादव ने जेल में उनसे अभी तक बहुत कम मुलाकात की है जिससे नाराजगी की बातें भी सामने आ चुकी है. शिवपाल यादव और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेता उनसे मिलने पहुंचे जिससे सियासी समीकरण बदलने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
चंद्रशेखर आजाद दलित-मुस्लिम समीकरण के सहारे यूपी की राजनीति में अपनी जगह बनाना चाहते हैं और आजम खान उनके लिए एक बड़ा चेहरा हो सकते हैं. वहीं ओवैसी भी इसी फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं. ऐसे में आजम की रिहाई से यूपी की सियासत में नई खिचड़ी पक सकती है.
इसे भी पढ़ें-न टीका लगवाऊंगा और न कलावा बांधूंगा, निकालना है तो निकाल दो- अबू आजमी
हालांकि आजम को जानने वाले कहते हैं कि वो सपा से नाराज जरूर हैं लेकिन पार्टी तो वो बिलकुल भी नहीं छोड़ेंगे. वो प्रेशर पॉलिटिक्स के माहिर खिलाड़ी हैं और बाहर आकर फिर से सपा में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश तो जरूर करेंगे. अब यही देखना होगा कि आजम खान की वापसी से यूपी की राजनीति किस दिशा में जाती है.
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
SRIGANGANAGAR 75TH VIJAYADASHAMI FESTIVAL: राजस्थान के श्रीगंगानगर में विजयदशमी के अवसर पर 70 फीट ऊंचे…
Devar Bhabhi Porn Ban: ब्रिटेन ने पोर्न वीडियो में सेक्स के दौरान चोकिंग और देवर-भाभी,…
Vijayadashami 2026: विजयादशमी 2026 पर जानें रावण (Ravana) के 10 सिरों का रहस्य. क्या वास्तव…
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल…
Bangladesh Saudi Arabia Over Death Penalty: मक्का में दो बांग्लादेशी नागरिकों को बिना बताए फांसी…
POONAM PANDEY REACTS TO TIGER SHROFF FIRING: मुंबई के पॉश इलाके जुहू में बॉलीवुड अभिनेता…