India In Donald Trump Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की महत्वाकांक्षी योजना ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) ने अब जमीन पर आकार लेना शुरू कर दिया है. गुरुवार (19 फरवरी) को वॉशिंगटन डीसी में इस शांति बोर्ड की पहली ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में दुनिया भर की नजरें भारत के कूटनीतिक रुख पर टिकी थीं. संयुक्त राष्ट्र (UN) के समानांतर खड़े किए जा रहे इस मंच पर भारत ने अपनी उपस्थिति तो दर्ज कराई, लेकिन एक बेहद सधी हुई रणनीति के साथ.
इस बैठक में लगभग 50 देशों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, इजराइल और तुर्किये समेत 27 देश पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल हैं. आइये जानें इस बैठक की पूरी डिटेल और भारत की भूमिका के बारे में…
भारत ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का सदस्य नहीं बना है, बल्कि उसने गुरुवार को हुई इस उद्घाटन बैठक में एक ‘पर्यवेक्षक’ (Observer) देश के तौर पर हिस्सा लिया. वॉशिंगटन डीसी स्थित ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ में आयोजित इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या सी खम्पा ने किया.
भारत को इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण अमेरिका की तरफ से मिला था. 12 फरवरी को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया था कि भारत इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का हमेशा समर्थन करता है. दावोस में इसके शुभारंभ से दूरी बनाने के बाद, पहली बैठक में भारत की ‘पर्यवेक्षक’ के रूप में मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि भारत इस संगठन की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है और शांति प्रयासों से जुड़ने को तैयार है, भले ही वह अभी इसका पूर्ण सदस्य न बने.
इस बोर्ड की रूपरेखा डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर पेश की थी. ट्रंप की महत्वाकांक्षा इस बोर्ड को एक ऐसे ताकतवर संगठन के रूप में पेश करने की है, जो सीधे संयुक्त राष्ट्र (UN) को टक्कर दे सके. ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना के तहत बने इस बोर्ड का शुरुआती मकसद गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की निगरानी करना था. लेकिन अब ट्रंप इसका दायरा बढ़ाकर इसे विश्व भर के संघर्षों को सुलझाने वाले मंच के रूप में स्थापित करना चाहते हैं.
ये भी पढ़ें: राफेल डील की आलोचना पर बोले फ्रांसिसी राष्ट्रपति, कहा- क्यों उठ रहें हैं सवाल… इससे तो भारत को ही मजबूती मिली है
पहली ही बैठक में सदस्य देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए खजाना खोल दिया. डोनाल्ड ट्रंप ने खुद घोषणा की कि अमेरिका इस बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि देगा. इसके अलावा, 9 सदस्य देशों (कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत) ने गाजा राहत पैकेज के लिए 7 अरब डॉलर का फंड देने पर सहमति जताई है. ट्रंप ने इसके लिए अंशदान करने वाले देशों का धन्यवाद करते हुए कहा कि खर्च किया गया हर एक डॉलर एक नए और शांतिपूर्ण क्षेत्र की आशा में निवेश है.
बैठक में ‘गाजा स्थिरीकरण बल’ (Gaza Stabilization Force) को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ. इस बल के प्रमुख मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स ने बताया कि योजना के तहत गाजा में शांति बहाली के लिए 12,000 पुलिसकर्मियों और 20,000 सैनिकों की तैनाती की जाएगी. इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया ने इन सैनिकों को भेजने का वादा किया है. मिस्र और जॉर्डन ने पुलिस बल को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी ली है. योजना के तहत इन सैनिकों की सबसे पहली तैनाती राफा शहर में की जाएगी, ताकि वहां सुरक्षा और पुनर्निर्माण के प्रयासों को तेजी से शुरू किया जा सके.
Bihar News: राघोपुर नाव हादसे के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे तेजस्वी यादव का…
Supreme Court: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 16…
Supreme Court: रेप के मामले में दोषी तरुण तेजपाल की ओर से दायर याचिका पर…
Supreme Court: तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास…
Elon Musk: ईरान ने एलन मस्क की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को राष्ट्रीय सुरक्षा के…
Delhi-NCR Weather: दिल्ली-NCR में दमघोंटू हवा और बढ़ते AQI के बीच मौसम करवट ले रहा…