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Pakistan News: ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) की नवीनतम रिपोर्ट ने पाकिस्तान और दक्षिण एशिया में गहराते खाद्य संकट की पोल खोलकर रख दी है. आर्थिक बदहाली, बेकाबू महंगाई, प्राकृतिक आपदाओं और वैश्विक संघर्षों के कारण पाकिस्तान में भुखमरी की स्थिति गंभीर हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की स्थिति सबसे चिंताजनक बनी हुई है और लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में आर्थिक संकट, बेकाबू महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं के कारण भुखमरी का स्तर बेहद गंभीर हो गया है. दक्षिण एशिया में कुपोषण और बाल वेस्टिंग के मामले बढ़े हैं. अंतर्राष्ट्रीय खाद्य सहायता में कटौती और वैश्विक संघर्षों ने पाकिस्तान सहित ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों में खाद्य सुरक्षा को संकट में डाल दिया है.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 के अनुसार, दक्षिण एशिया में पाकिस्तान का हंगर स्कोर सबसे अधिक है, जो देश में तेजी से बढ़ती भुखमरी की ओर इशारा करता है. रिपोर्ट ‘वेल्थंगरहिल्फे’, रूर यूनिवर्सिटी बोचुम और स्विस संगठन ‘हेल्वेटास’ द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई है. इस वर्ष रिपोर्ट की थीम “खाद्य सुरक्षा के बिना कोई सुरक्षा नहीं” रखी गई है, जो यह स्पष्ट करती है कि खाद्य संकट सीधे तौर पर क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर रहा है.
पाकिस्तान में लगातार आर्थिक अस्थिरता और खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों ने आम लोगों की क्रय शक्ति को तोड़ दिया है. 2018 की तुलना में देश में कुपोषण का स्तर बढ़ा है, जो अब ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच चुका है. इसके अलावा, बच्चों में ‘वेस्टिंग’ (उम्र के अनुपात में वजन कम होना) की समस्या ‘उच्च’ स्तर पर पहुंच गई है, जिससे बाल स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है.
दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय हंगर स्कोर 23.5 दर्ज किया गया है. यद्यपि वर्ष 2000 के तुलनात्मक आंकड़े (37.5) से स्थिति कुछ बेहतर है, लेकिन 2018 के बाद से यह सुधार पूरी तरह थम गया है. पाकिस्तान और बांग्लादेश में भीषण बारिश और बाढ़ के कारण कृषि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, वहीं अफगानिस्तान में सूखे और उच्च तापमान ने अनाज उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है.
वैश्विक स्तर पर लगभग दो दशकों की प्रगति के बाद भुखमरी की समस्या दोबारा गहराने लगी है. 2026 का वैश्विक हंगर स्कोर 18.1 है, जो 2018 के 17.6 से अधिक खराब है. वैश्विक सशस्त्र संघर्षों, ईंधन-उर्वरक की बढ़ती कीमतों और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सहायता फंडिंग में 2016-17 के स्तर तक हुई कटौती के कारण राहत और आपातकालीन राशन कार्यक्रमों को बड़ा झटका लगा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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