राष्ट्रीय राजधानी के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के तहत ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ (BRICS Business Forum) के लीडर्स सेशन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भारत के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की. ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी विश्वास और रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत मूल्यवान एवं निर्णायक कदम उठाए हैं.
उन्होंने वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में विश्व भू-राजनीतिक और आर्थिक रूप से अपने सबसे जटिल दौर से गुजर रहा है. ऐसे में ब्रिक्स को महज संभावनाओं पर चर्चा करने से आगे बढ़कर ठोस और व्यावहारिक आर्थिक भागीदारी की दिशा में कदम बढ़ाना होगा.
अपने संबोधन की शुरुआत में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भारत सरकार और भारतीय जनता का शानदार आतिथ्य सत्कार एवं मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा:
“मैं इस ऐतिहासिक बैठक की भव्य मेजबानी के लिए भारत की मित्र सरकार और वहां के लोगों का हृदय से धन्यवाद करता हूं. इसके साथ ही ब्रिक्स के भीतर बहुपक्षीय सहयोग को नई मजबूती देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुमूल्य प्रयासों की मैं विशेष रूप से सराहना करता हूं.”
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस फोरम में निजी क्षेत्र, उद्योगपतियों और युवा उद्यमियों की सहभागिता सबसे अहम है, क्योंकि यही वर्ग नीतियों को वास्तविक जमीनी व्यापार और आर्थिक उपलब्धियों में बदलने का माद्दा रखता है.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया सप्लाई चेन (आपूर्ति शृंखला) में रुकावट, जियोपॉलिटिकल तनाव और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों के दुरुपयोग जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है.
उन्होंने कहा कि इन सभी संकटों का समाधान ब्रिक्स समूह के पास है. ब्रिक्स की वास्तविक ताकत सिर्फ सदस्य देशों की जीडीपी या अर्थव्यवस्थाओं के बड़े आकार में नहीं, बल्कि आपसी व्यापार, सीमा-पार निवेश और संयुक्त वित्तपोषण (Joint Financing) का एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करने में है.
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने वित्तीय संप्रभुता पर बल देते हुए दो प्रमुख सुझाव रखे:
स्थानीय मुद्राओं का विस्तार: ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में सदस्य देशों की राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाया जाए, ताकि सीमित मुद्राओं (डॉलर/पश्चिमी व्यवस्था) पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पैदा होने वाले राजनीतिक व आर्थिक झटकों से बचा जा सके.
न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) का सशक्तिकरण: उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिक्स के ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ को सदस्य देशों में ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के वित्तपोषण का मुख्य इंजन बनाया जाए. बैंक को स्थानीय मुद्राओं में समर्पित क्रेडिट लाइन और निजी पूंजी आकर्षित करने के लिए मजबूत गारंटी तंत्र स्थापित करना चाहिए.
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