किन जोंग उन का तगड़ा प्रोटोकॉल
Kim Jong Un protocol: चीन की राजधानी बीजिंग में इस साल के SCO समिट का आयोजन किया गया. इसी में शामिल होकर पीएम मोदी सोमवार को भारत लौटे हैं. हालांकि, कई देशों के प्रतिनिधि अभी भी वहां रुके हैं और द्विपक्षीय वार्ता कर रहे हैं. इसी दौरान कई ऐसी खबरें आ रहे हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है. पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक वीडियो आया जिसमें वो पुतिन के सामने पाकिस्तान की किरकिरी करा रहे हैं. अब नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग उन का पुतिन के साथ बैठक का वीडियो आया है सामने आया है. इसे देखकर लोग कह रहे हैं भाई इनका प्रोटोकॉल तो डोनाल्ड ट्रंप से भी तगड़ा है.
मंगलवार को बीजिंग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग उन की द्विपक्षीय वार्ता (Kim Jong Un With Putin) थी. दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की. कुछ समय बात जब बैठक समाप्त हुई किंग के गार्ड वहां दाखिल हो गए. इसके बाद चला एक सफाई अभियान जो सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है और कई सवालों को जन्म दे रहा है.
बीजिंग में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन (North Korea Kim Jong Un) और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद एक अजीबोगरीब नजारा सामने आया. किम जोंग उन के पुतिन से मिलने के बाद उनके सहायक तेजी से कमरे में घुसे और हर उस सतह को सैनिटाइज करने लगे, जिसे किम ने छुआ था. इसमें कुर्सी की पीठ, आर्मरेस्ट और यहां तक कि साइड टेबल भी शामिल थे. सहायक किम के इस्तेमाल किए गए गिलास को भी बड़ी नजाकत से उठाकर ले गए.
इस नाजारे का वीडियो भारत में भी तेजी से वायरल हो रहा है. इसे शेयर करते हुए लोग कह रहे हैं कि यह रूस और चीन में किम की हैसियत है. दावा किया जा रहा है कि यह सफाई अभियान चीन के द्वारा कराई गई. चीनी सरकार को किम पर आशंका है. इस कारण उन्होंने जिस-जिस चीज को छुआ उसे सेनेटाइज कराया गया है.
रूसी पत्रकार अलेक्जेंडर यूनाशेव ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि किम जोंग उन के सहायक उनके डीएनए के निशान मिटाने के लिए इतनी सावधानी बरत रहे थे जैसे कोई फॉरेंसिक टीम अपराध स्थल पर पहुंची हो. यूनाशेव के मुताबिक, दोनों नेताओं की बातचीत सकारात्मक रही और दोनों ही नेता संतुष्ट नजर आए. इसके बाद वे एक अनौपचारिक सेटिंग में चाय पीने चले गए.
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विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग उन की टीम को शायद इस बात का डर था कि रूसी सुरक्षा एजेंसियां या चीनी खुफिया तंत्र उनके नेता के डीएनए, पसीने या शरीर से जुड़े अन्य बायोलॉजिकल सैंपल न ले सकें. यह पहली बार नहीं है जब किसी नेता की जैविक पहचान की सुरक्षा के लिए इतनी सावधानी बरती गई हो. पुतिन खुद भी अपने डीएनए की सुरक्षा के लिए काफी सावधानी बरतते हैं.
एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या किम जोंग उन का प्रोटोकॉल क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Kim Jong Un And Donald Trump Protocol) से भी तगड़ा है. क्योंकि, उनकी सुरक्षा को दुनिया में सबसे पुख्ता सुरक्षा माना जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब भी पुतिन विदेश यात्राओं पर जाते हैं, उनकी टीम उनके यूरीन और मल को सीलबंद बैग्स में इकट्ठा करती है और खास सूटकेस में वापस रूस ले आती है. यह प्रथा 2017 से ही अपनाई जा रही है, जिसका मकसद है कि किसी भी शत्रु देश को उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी न मिल सके.
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