अजब-गजब

20-25 तो छोड़ो 95 हजार कमाने वालों का भी दिल्ली-NCR में रहना मुश्किल, IIT के छात्र का दर्द हुआ वायरल

Delhi NCR Living Cost: दिल्ली-एनसीआर में रहना अब आम आदमी के बस की बात नहीं रही!” अगर आप भी नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली या गुरुग्राम में रहते हैं, तो यह लाइन आपने अपने दोस्तों या दफ्तर के कलीग्स से कभी न कभी जरूर सुनी होगी. लेकिन इस बार ये चर्चा किसी आम दफ्तर की कैंटीन से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के गलियारे से आई है. वजह बना है IIT के पीएचडी छात्र का पोस्ट, जिसके दिल्ली-एनसीआर के लिविंग कॉस्ट ने इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है.

छात्र का कहना है कि एनसीआर में बहुत ही सिंपल यानी साधारण जिंदगी जीने के लिए भी एक कपल को हर महीने कम से कम 85 हजार से 95 हजार रुपये की जरूरत होती है. इस पोस्ट के सामने आते ही मिडिल क्लास नौकरीपेशा लोगों का दर्द छलक पड़ा है.

50-60 हजार वालों का कैसे हो रहा गुजारा?

दरअसल, आईआईटी के इस पीएचडी छात्र, जिनका नाम मिश्रा देव है, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर किया. उन्होंने लिखा कि उन्हें सचमुच ये बात समझ नहीं आती कि कोई शादीशुदा जोड़ा या कपल 50 से 60 हजार रुपये की महीने की सैलरी में दिल्ली-एनसीआर जैसे महंगे इलाके में अपना गुजारा कैसे कर पा रहा है.

छात्र ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि वे खुद बेहद साधारण लाइफस्टाइल जीते हैं. कोई फालतू का दिखावा या बहुत ज्यादा हाई-फाई शौक नहीं हैं. इसके बावजूद, जब वे महीने के आखिर में अपने खर्चों का हिसाब जोड़ते हैं, तो दो लोगों का मामूली खर्च भी आराम से 85 हजार से लेकर 95 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. मिश्रा देव का ये सवाल सीधे तौर पर उन लाखों युवाओं के दिल पर लगा है जो हर महीने सैलरी आने से पहले ही बजट बनाने के चक्कर में सिर पकड़ लेते हैं.

किराया, बिजली और ग्रॉसरी… सभी जेब कर रहे खाली

आईआईटी के इस छात्र ने अपने पोस्ट में उन सभी बुनियादी खर्चों को उंगलियों पर गिनाया है, जो हर महीने मिडिल क्लास के बजट पर डाका डालते हैं. उन्होंने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में सिर्फ मकान का किराया ही आसमान नहीं छू रहा, बल्कि उसके साथ जुड़ने वाले मेंटेनेंस चार्ज, भारी-भरकम बिजली-पानी के बिल, रोजमर्रा का राशन (किराना), ऑफिस आने-जाने का ट्रैवलिंग खर्च और छोटी-मोटी आपातकालीन जरूरतें मिलकर जेब पूरी तरह खाली कर देती हैं. ऐसे में जो लोग 50-60 हजार कमा रहे हैं, वे या तो अपनी बुनियादी जरूरतों से समझौता कर रहे हैं या फिर हर महीने कर्ज के जाल में फंस रहे हैं.

2 BHK का किराया 50 हजार, मेंटेनेंस अलग

इस पोस्ट के वायरल होते ही मानो सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई. हर कोई अपनी-अपनी आपबीती सुनाने लगा. मिश्रा देव के पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने बताया कि वह पिछले दिनों नोएडा के एक अच्छे इलाके में किराए पर घर ढूंढने निकला था, लेकिन वहां सोसायटियों के रेट देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई.

यूजर के अनुसार, नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में एक साधारण से 2 BHK फ्लैट का किराया 45 हजार से 50 हजार रुपये महीना मांगा जा रहा है. इतना ही नहीं, मकान मालिक इस किराए के अलावा हर महीने हजारों रुपये का मेंटेनेंस चार्ज अलग से वसूलते हैं. वहीं, अगर कोई थोड़ा बड़ा परिवार यानी 3 BHK फ्लैट देखने जाए, तो उसका किराया 75 हजार रुपये और ऊपर से 15 हजार रुपये का मेंटेनेंस चार्ज बताया जा रहा है. यानी सिर्फ रहने का खर्च ही ₹90,000 प्रति महीना बैठ रहा है, खाना-पीना और घूमना तो अभी दूर की बात है.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मिश्रा देव के इस पोस्ट ने दिल्ली-एनसीआर के नौकरीपेशा समाज को दो गुटों में बांट दिया है. एक तरफ वो लोग हैं जो छात्र की बात से 100% सहमत हैं. लोग कह रहे हैं कि गुड़गांव और नोएडा जैसे शहरों में मकान मालिकों की मनमानी और बढ़ती महंगाई ने जीना मुहाल कर दिया है. बच्चों की स्कूल फीस और सोसायटी के चार्ज मिलाकर मिडिल क्लास सिर्फ ‘जीने के लिए कमा रहा है’, बचा कुछ नहीं पा रहा.

वहीं दूसरी तरफ, कुछ लोगों का मानना है कि ये सब आपकी प्राथमिकताओं और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है. अगर आप दिल्ली-एनसीआर के थोड़ा आउटर इलाकों में रहें, मेट्रो या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें और हाई-फाई सोसायटियों के बजाय स्वतंत्र मकानों में रहें, तो आज भी 50 से 60 हजार रुपये में एक छोटा परिवार सम्मानजनक जिंदगी जी सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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