World’s Most Expensive Oil: तेल की बात करें तो दुनिया में तरह-तरह के तेल मौजूद हैं, जिनमें कुकिंग ऑयल, पशु आधारित तेल शामिल हैं. लेकिन आज हम आपको ऐसे तेल की बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी डिमांड पूरी दुनिया में है और जिसे इसके दुर्लभ गुणों और ऊंची कीमत की वजह से ‘लिक्विड गोल्ड’ (Liquid Gold) भी कहा जाता है.
अफ्रीका के मोरक्को में पाए जाने वाले आर्गन पेड़ पर छोटे-छोटे फल उगते हैं. इन्हीं फलों के बीज से ये खास निकलता है. सदियों से इस तेल का इस्तेमाल बालों और त्वचा को मुलायम और पोषित बनाने के लिए किया जाता रहा है. आज यह दुनियाभर में लक्जरी स्किनकेयर और हेयरकेयर प्रोडक्ट्स (Skin Care Tips) का अहम हिस्सा बन चुका है. यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे महंगा आयल कहा जाता है. इसे आर्गन तेल (Argan Oil) के नाम से भी जाना जाता है.
आपको बता दें जैसे इस तेल की कीमत भी सबसे महंगी है, उसी तरह इस तेल को बनाने की प्रक्रिया बेहद मुश्किल है. दरअसल मोरक्को के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं जंगल से आर्गन के फल इकट्ठा करती हैं. फिर पारंपरिक तरीके से पत्थर की चक्की में उन्हें तोड़कर बीज को अलग करती हैं. एक किलो बीज तैयार करने में दो दिन की मेहनत लगती है.
इन बीजों की स्थानीय बाजार में कीमत लगभग तीन डॉलर यानी करीब 260 रुपये होती है. इसके बाद सहकारी समितियों (Co-operatives) के जरिए बीज इकट्ठा किए जाते हैं. इन्हीं समितियों से बड़ी-बड़ी कॉस्मेटिक कंपनियां तेल खरीदती हैं और विदेशों में भारी मुनाफे पर बेचती हैं.
स्थानीय समितियों के अनुसार, बीते तीन दशकों में आर्गन तेल की कीमतों (Most Expensive Oil) में जबरदस्त उछाल आया है. पहले जहां एक लीटर तेल की कीमत करीब 25 दिरहम (₹200) होती थी, वहीं अब यह 600 दिरहम (करीब ₹5,000) तक पहुंच चुकी है. विदेशी बाजार में इसकी कीमत और भी ज्यादा है. एक लीटर शुद्ध आर्गन ऑयल की कीमत आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग ₹12,000 तक पहुंच चुकी है.
भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. ऑनलाइन और ऑफलाइन ( Best Oil For Skin Care) ब्यूटी प्रोडक्ट्स में आर्गन ऑयल शैम्पू, सीरम, मॉइश्चराइज़र और फेस ऑयल्स आसानी से मिल जाते हैं. 50 एमएल की एक छोटी बोतल 350 से 400 रुपये तक में बिकती है, जबकि 250 ग्राम पैक की कीमत 4,000 रुपये से भी ज्यादा होती है.
आर्गन पेड़ मोरक्को के उन बंजर इलाकों में पाए जाते हैं, जहां सालाना बारिश एक इंच से भी कम होती है और तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इनकी गहरी जड़ें (35 मीटर तक) मिट्टी को थामे रखती हैं और रेगिस्तान को फैलने से रोकती हैं. यही वजह है कि यह पेड़ न सिर्फ इंसानों और जानवरों के लिए भोजन का स्रोत हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत जरूरी है. इन पेड़ों के फलों को बकरियां भी बड़े शौक से खाती हैं. सबसे खास बात यह है कि बकरियों द्वारा खाए गए फल और फैले बीज जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जनन (Regeneration Cycle) में मदद करते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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