एक समय था जब इंटरनेट का इस्तेमाल करना हर किसी के बस की बात नहीं थी. महंगे डेटा प्लान और सीमित इंटरनेट स्पीड के चलते गांवों और छोटे शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोग ऑनलाइन दुनिया से दूर रहते थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है.
आज देश के छोटे-छोटे कस्बों से लेकर बड़े महानगरों तक लोग इंटरनेट के जरिए न सिर्फ मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि अपनी पहचान बना रहे हैं और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं. इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं, लेकिन रिलायंस जियो की एंट्री को इस डिजिटल बदलाव का एक अहम मोड़ माना जाता है.
भारत की क्रिएटर इकॉनमी आज करीब 15 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचने की बात कही जा रही है. यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों लोग अपने वीडियो, रील्स और दूसरे कंटेंट के जरिए दर्शकों तक पहुंच रहे हैं. इनमें से कई लोगों ने तो सोशल मीडिया को ही अपना पूरा करियर बना लिया है.
जब मुकेश अंबानी ने जियो की शुरुआत का ऐलान किया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसका असर देश की डिजिटल दुनिया पर इतना बड़ा होगा. शुरुआत में मुफ्त इंटरनेट और बाद में बेहद कम कीमत पर डेटा उपलब्ध कराने की रणनीति ने टेलीकॉम बाजार की तस्वीर बदल दी.
जियो ने शुरुआती छह महीनों तक ग्राहकों को मुफ्त इंटरनेट की सुविधा दी. इसके बाद भी डेटा की कीमतें पहले के मुकाबले काफी कम बनी रहीं. इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिला. अब इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए हर महीने बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं रह गई थी.
गांवों में रहने वाले युवा, छोटे शहरों की छात्राएं, नौकरी की तलाश कर रहे लोग और मध्यमवर्गीय परिवार बड़ी संख्या में इंटरनेट से जुड़ने लगे. जिन लोगों के लिए ऑनलाइन दुनिया कभी दूर की चीज हुआ करती थी, वे भी अब वीडियो देख सकते थे, ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते थे और अपनी बात दुनिया तक पहुंचा सकते थे.
सस्ता इंटरनेट मिलने के साथ ही स्मार्टफोन की मांग भी तेजी से बढ़ी. लोगों को समझ आने लगा कि मोबाइल फोन सिर्फ कॉल करने या मैसेज भेजने का साधन नहीं है. इसके जरिए पढ़ाई, कारोबार, मनोरंजन और कमाई के नए रास्ते भी खुल सकते हैं.
धीरे-धीरे स्मार्टफोन कंपनियों ने भी भारतीय बाजार में किफायती मॉडल पेश किए. नतीजा यह हुआ कि इंटरनेट और स्मार्टफोन एक-दूसरे की जरूरत बन गए. ज्यादा लोगों के पास फोन पहुंचे तो इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा और डेटा सस्ता होने से स्मार्टफोन की उपयोगिता भी बढ़ गई.
इस बदलाव ने भारत को दुनिया के बड़े डिजिटल बाजारों में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई.
इस पूरी डिजिटल क्रांति का सबसे दिलचस्प असर क्रिएटर इकॉनमी पर देखने को मिला. पहले वीडियो बनाने और लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़े कैमरे, महंगे उपकरण और किसी मीडिया संस्थान का सहारा लेना पड़ता था. अब एक सामान्य स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन के जरिए भी कोई व्यक्ति अपनी प्रतिभा लोगों के सामने रख सकता है.
यूट्यूब पर खाना बनाने की रेसिपी बताने वाले, इंस्टाग्राम पर फैशन और ब्यूटी टिप्स देने वाले, गांवों की जिंदगी दिखाने वाले और मनोरंजक वीडियो बनाने वाले लोगों को लाखों दर्शक मिलने लगे.
कई ऐसे क्रिएटर्स भी सामने आए हैं, जिन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत की और धीरे-धीरे अच्छी पहचान बना ली. आज वे विज्ञापन, ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप और दूसरे डिजिटल माध्यमों से कमाई कर रहे हैं.
इसका फायदा सिर्फ वीडियो बनाने वालों तक सीमित नहीं है. वीडियो एडिटर, ग्राफिक डिजाइनर, सोशल मीडिया मैनेजर, फोटोग्राफर और डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं. यानी एक क्रिएटर के सफल होने से उसके आसपास कई दूसरे लोगों को भी काम मिल सकता है.
जियो के आने के बाद डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि अब लोकप्रियता और पहचान सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही. छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका मिला.
किसी गांव का युवा खेती से जुड़े नए तरीके बताकर लोकप्रिय हो सकता है, तो कोई छोटे शहर की लड़की अपने हुनर के दम पर हजारों लोगों का ध्यान खींच सकती है. स्थानीय भाषा में बनने वाले वीडियो भी बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच रहे हैं.
इससे क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय संस्कृति को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई जगह मिली है. कई ऐसे विषय, जिन्हें पहले मुख्यधारा के मीडिया में ज्यादा जगह नहीं मिलती थी, अब सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंच रहे हैं.
सस्ते इंटरनेट का असर केवल सोशल मीडिया और वीडियो तक नहीं रहा. ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, टेलीमेडिसिन और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों को भी इससे गति मिली.
छोटे शहरों के छात्र ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं. दुकानदार इंटरनेट के जरिए अपने उत्पाद ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं. लोग घर बैठे डिजिटल भुगतान कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं का सहारा भी ले सकते हैं.
हालांकि, डिजिटल दुनिया में चुनौतियां भी हैं. हर कंटेंट क्रिएटर को सफलता या नियमित कमाई नहीं मिलती. इंटरनेट की पहुंच, डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी जैसे मुद्दों पर अभी भी काम करने की जरूरत है.
आज भारत में क्रिएटर इकॉनमी जिस मुकाम पर दिखाई दे रही है, उसके पीछे कई कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्मार्टफोन निर्माताओं और लाखों कंटेंट क्रिएटर्स की मेहनत है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में जियो ने सस्ते इंटरनेट के जरिए एक बड़ी भूमिका निभाई.
मुकेश अंबानी की जिस पहल को शुरुआत में एक टेलीकॉम ऑफर के तौर पर देखा जा रहा था, उसने आगे चलकर देश के इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को बदलने में योगदान दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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