विश्लेषण

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले ने पुनः जीवंत की लैटिन अमेरिका में हस्तक्षेप की बहस: पनामा 1989 का उदाहरण

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए सैन्य हमलों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर किए गए इन हमलों में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को गिरफ्तार कर लिया गया. यह घटना न केवल वेनेजुएला के राजनीतिक संकट को उजागर करती है, बल्कि लातिन अमेरिकी देशों में अमेरिकी हस्तक्षेप के लंबे इतिहास को फिर से चर्चा में ला दिया. विशेष रूप से, 1989 में पनामा पर अमेरिकी आक्रमण की यादें ताजा हो गई हैं, जहां अमेरिका ने तत्कालीन तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से हटाने के लिए सैन्य कार्रवाई की थी.

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

अमेरिका का लातिन अमेरिका में हस्तक्षेप का इतिहास 19वीं शताब्दी से चला आ रहा है, जो मोनरो डॉक्ट्रिन (1823) से प्रेरित रहा है. इस नीति के तहत, अमेरिका ने यूरोपीय शक्तियों को लातिन अमेरिका से दूर रखने का दावा किया, लेकिन खुद ने कई बार सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक हस्तक्षेप किए. कुछ प्रमुख उदाहरण :

– 1898 का स्पेनिश-अमेरिकी युद्ध: इस युद्ध के परिणामस्वरूप क्यूबा स्वतंत्र हुआ, लेकिन प्यूर्टो रिको अमेरिका के कब्जे में आ गया. अमेरिका ने क्यूबा में कई बार हस्तक्षेप किया, जिसमें 1906-1909 और 1917-1922 के दौरान सैन्य कब्जा शामिल है.

– चिली में 1973 का तख्तापलट: अमेरिका ने सल्वाडोर अयेन्दे की निर्वाचित सरकार को गिराने में CIA के माध्यम से सहायता की, जिसके बाद ऑगस्टो पिनोशे की तानाशाही स्थापित हुई. यह कम्युनिस्ट प्रभाव को रोकने के लिए किया गया.

– ग्रेनाडा पर 1983 का आक्रमण: राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने कम्युनिस्ट सरकार को हटाने के लिए अमेरिकी सेनाओं को भेजा, जिससे क्यूबाई प्रभाव को रोका गया.

– निकारागुआ और अन्य: 1980 के दशक में अमेरिका ने कॉन्ट्रा विद्रोहियों को समर्थन दिया, जो सैंडिनिस्टा सरकार के खिलाफ थे. इसके अलावा, हैती (1891, 1915-1934), डोमिनिकन गणराज्य (1965), और पनामा में कई हस्तक्षेप हुए.

ये हस्तक्षेप अक्सर ड्रग ट्रैफिकिंग, कम्युनिज्म, या अमेरिकी हितों की रक्षा के नाम पर किए गए, लेकिन इनसे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा. वेनेजुएला पर हालिया हमले भी ड्रग ट्रैफिकिंग और राजनीतिक अस्थिरता के आरोपों पर आधारित हैं, जो इन ऐतिहासिक पैटर्न से मेल खाते हैं.

ऑपरेशन जस्ट कॉज

1989 का पनामा आक्रमण लातिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप का एक प्रमुख उदाहरण है, जो वर्तमान वेनेजुएला संदर्भ से काफी समानता रखता है. 20 दिसंबर 1989 को शुरू हुए इस ऑपरेशन में अमेरिका ने 27,000 सैनिकों को भेजा, जो पनामा की रक्षा सेनाओं (PDF) को हराने और तत्कालीन नेता मैनुअल नोरिएगा को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से था.

कारण और पृष्ठभूमि:

– नोरिएगा पहले CIA के सहयोगी थे, लेकिन 1980 के दशक में उन्होंने ड्रग ट्रैफिकिंग में संलिप्तता दिखाई और 1989 के चुनावों को रद्द कर दिया.
– अमेरिकी सैनिकों पर हमले और एक अमेरिकी मरीन की हत्या ने राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया.
– आक्रमण का औपचारिक नाम “ऑपरेशन जस्ट कॉज” था, जो अमेरिकी हितों, लोकतंत्र की बहाली और ड्रग ट्रैफिकिंग को रोकने पर आधारित था.

घटना का विवरण:

– आक्रमण रात में शुरू हुआ, जिसमें अमेरिकी नेवी सील्स ने पनामा कैनाल क्षेत्र के ठिकानों पर कब्जा किया.
– 3 जनवरी 1990 को नोरिएगा ने आत्मसमर्पण कर दिया, और उन्हें अमेरिका ले जाया गया जहां उन्हें ड्रग ट्रैफिकिंग के आरोप में सजा हुई.
– हताहत: 23 अमेरिकी सैनिक, 3 नागरिक, लगभग 150 PDF सैनिक और 500 पनामाई नागरिक मारे गए.

यह आक्रमण संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा आलोचना का शिकार हुआ, लेकिन अमेरिका ने इसे सफल माना. वेनेजुएला पर हालिया हमलों में भी मदुरो को ड्रग ट्रैफिकिंग से जोड़ा गया है, और ट्रम्प ने उन्हें कैप्चर किया, जो पनामा की घटना से समानता को दर्शाता है.

वर्तमान संदर्भ और निहितार्थ

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले ने पनामा 1989 को इसलिए चर्चा में ला दिया क्योंकि दोनों में ड्रग ट्रैफिकिंग, तानाशाही और अमेरिकी हितों की रक्षा के तर्क समान हैं. ब्राजील जैसे लातिन अमेरिकी देशों ने इन हमलों की निंदा की है, इसे “अस्वीकार्य” बताया. इतिहास बताता है कि ऐसे हस्तक्षेप अक्सर लंबे समय तक अस्थिरता पैदा करते हैं, जैसे पनामा में आक्रमण के बाद की राजनीतिक उथल-पुथल. अमेरिकी हस्तक्षेप की परंपरा लातिन अमेरिका के लिए एक चुनौती बनी हुई है.

वेनेजुएला में अमेरिका का सर्जिकल स्ट्राइक! डोनाल्ड ट्रंप ने किया निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेने का दावा

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

उज्जैन में पत्थरबाजों की निकली हेकड़ी: दबोचे गए 20 उपद्रवी, मुंह छिपाते आए नजर

Ujjain Shahi Masjid controversy: उज्जैन शाही मस्जिद विवाद और पथराव के मामले में पुलिस ने…

13 minutes ago

निवेश से एक्सपोर्ट तक, कैसे यूपी बन रहा बिजनेस हब? जानें मंत्री नंद गोपाल नंदी की भूमिका

UP Investment Hub: उत्तर प्रदेश को निवेश और कारोबार का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिशों…

22 minutes ago

यंग तुर्क की विरासत: कैसे बलिया की क्रांति आज भी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को गढ़ रही?

Chandra Shekhar Young Turk: बलिया के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को ‘यंग तुर्क’ कहा गया, लेकिन…

51 minutes ago

सनोज मिश्र सभी आरोपों से बरी, तीस हजारी कोर्ट ने दी क्लीन चिट; अब वसीम रिजवी का क्या?

फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले…

55 minutes ago

ग्रीन रिवोल्यूशन 2.0: कैसे सूर्य प्रताप शाही ने यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाया

UP Agriculture में डिजिटल खेती, कृषि रिसर्च, प्राकृतिक खेती, सोलर पंप और बेहतर बाजार व्यवस्था…

1 hour ago

‘न पर्दा, न लाउडस्पीकर और न कोई ताम झाम!’ लालटेन की रोशनी में मंचन, यूनेस्को धरोहर ‘रामनगर रामलीला’ की अनकही कहानी

Ramnagar Ramlila: वाराणसी के रामनगर की रामलीला 220 साल से ज्यादा पुरानी जीवंत परंपरा है,…

1 hour ago