बिजनेस

अडानी पावर का बड़ा धमाका! दूसरी तिमाही में मुनाफा 142% बढ़कर ₹7,019 करोड़, कमाई में भी जबरदस्त उछाल

देश में बिजली की बढ़ती मांग का फायदा अडानी पावर को मिलता नजर आ रहा है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर 2026) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 142 फीसदी बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने 2,906 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था.

कंपनी की कमाई और परिचालन प्रदर्शन में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली. अडानी पावर का कुल रिपोर्टेड रेवेन्यू 39 फीसदी बढ़कर 19,951 करोड़ रुपये हो गया, जबकि रिपोर्टेड EBITDA में 46 फीसदी की तेजी आई और यह 8,743 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. कंपनी के मुताबिक, बिजली की मजबूत मांग, बेहतर बिजली बिक्री दरों और पिछले समय से जुड़ी कुछ अतिरिक्त आय की पहचान ने इन नतीजों में अहम भूमिका निभाई.

बिजली की बढ़ती मांग से कारोबार को मिला सहारा

देशभर में बिजली की खपत बढ़ने का असर बिजली कंपनियों के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है. अडानी पावर ने दूसरी तिमाही में कुल 26.4 बिलियन यूनिट (BU) बिजली बेची, जो पिछले साल की समान अवधि के 23.7 बिलियन यूनिट से 11.5 फीसदी अधिक है.

कंपनी की बिजली उत्पादन क्षमता 18,150 मेगावाट पर बनी रही. वहीं, प्लांट लोड फैक्टर (PLF), यानी बिजली संयंत्रों की उपलब्ध क्षमता के मुकाबले उनके इस्तेमाल का स्तर, 62.8 फीसदी से बढ़कर 70.1 फीसदी हो गया. यह बढ़ोतरी बताती है कि कंपनी के बिजली संयंत्रों का इस्तेमाल पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुआ.

अगर केवल नियमित कारोबार के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कंपनी का रेवेन्यू 28.5 फीसदी बढ़कर 17,528 करोड़ रुपये रहा. वहीं, इसी आधार पर EBITDA 18.5 फीसदी की बढ़त के साथ 6,321 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इन आंकड़ों से पता चलता है कि ईंधन की बढ़ी लागत के बावजूद कंपनी का मुख्य कारोबार बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहा.

देश में बिजली की मांग ने बनाया नया दबाव

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत में बिजली की मांग सालाना आधार पर 11.5 फीसदी बढ़कर 502 बिलियन यूनिट रही. कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और कमजोर मानसून के कारण बिजली की जरूरत बढ़ी.

मांग बढ़ने के साथ देश में कुल बिजली उत्पादन भी करीब 11 फीसदी बढ़कर 536 बिलियन यूनिट तक पहुंच गया. जलविद्युत उत्पादन की सीमित उपलब्धता के बीच कोयले और लिग्नाइट से बनने वाली बिजली की भूमिका और बढ़ गई. दूसरी तिमाही में देश की कुल बिजली आपूर्ति में इन स्रोतों की हिस्सेदारी 66 फीसदी रही, जबकि पिछले साल यह 65 फीसदी थी.

इस दौरान देश में बिजली की अधिकतम मांग 270 गीगावाट तक पहुंच गई, जो पिछले साल दर्ज 230 गीगावाट से 18 फीसदी ज्यादा है. उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में अधिकतम मांग 27-27 गीगावाट रही. गुजरात में यह 23 गीगावाट, तमिलनाडु में 20 गीगावाट और कर्नाटक में 16 गीगावाट दर्ज की गई.

बिजली की मांग बढ़ने का असर खुले बाजार में कीमतों पर भी पड़ा. इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के डे-अहेड मार्केट में बिजली की औसत कीमत सालाना आधार पर 46 फीसदी बढ़कर 5.7 रुपये प्रति यूनिट हो गई. वहीं, रियल-टाइम मार्केट में कीमत 49 फीसदी बढ़कर 5.2 रुपये प्रति यूनिट पहुंच गई.

बिजली बेचने से होने वाली कमाई में भी सुधार

अडानी पावर को बिजली बिक्री की बेहतर कीमतों का भी फायदा मिला. लंबी अवधि के बिजली खरीद समझौतों (PPA) के तहत कंपनी की बिजली बिक्री 29.7 फीसदी बढ़कर 23.4 बिलियन यूनिट हो गई. इस कारोबार में प्रति यूनिट औसत प्राप्ति भी 12.7 फीसदी बढ़कर 6.4 रुपये रही.

दूसरी ओर, मर्चेंट और शॉर्ट-टर्म बाजार में बिजली की औसत बिक्री कीमत 33.1 फीसदी बढ़कर 7.2 रुपये प्रति यूनिट हो गई. हालांकि, इस बाजार में कंपनी की बिजली आपूर्ति की मात्रा 43 फीसदी घट गई. इसकी वजह यह रही कि कंपनी ने अपनी उपलब्ध क्षमता का ज्यादा हिस्सा मध्यम अवधि के बिजली समझौतों के तहत जोड़ दिया.

कंपनी को लंबी अवधि के समझौतों के साथ-साथ बेहतर बाजार कीमतों से भी सहारा मिला. हालांकि, मुनाफे में तेज उछाल को समझने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसमें नियमित कारोबार के बेहतर प्रदर्शन के अलावा पिछली अवधि से जुड़ी अतिरिक्त आय की पहचान का भी योगदान रहा.

उत्तराखंड में 25 साल तक बिजली सप्लाई का समझौता

कंपनी ने कारोबार बढ़ाने के लिए नए समझौतों और परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया है. अडानी पावर को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से 1,320 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर क्षमता से बिजली आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (LOA) मिला है. इसमें शुद्ध आपूर्ति क्षमता 1,234 मेगावाट बताई गई है.

यह समझौता 25 साल की अवधि के लिए है. कंपनी के मुताबिक, इस समझौते के बाद उसकी आगामी 23.72 गीगावाट की थर्मल पावर क्षमता में से करीब 62 फीसदी क्षमता के लिए बिजली बिक्री की व्यवस्था हो जाएगी.

इस तरह के लंबे समझौते बिजली उत्पादकों को भविष्य में होने वाली बिक्री की बेहतर योजना बनाने में मदद करते हैं. साथ ही, बिजली खरीदने वाली संस्थाओं को भी लंबे समय तक आपूर्ति की व्यवस्था करने में सहूलियत मिलती है.

हाइड्रोपावर कारोबार में भी कदम बढ़ा रही कंपनी

अडानी पावर अब अपने कारोबार को केवल थर्मल पावर तक सीमित रखने के बजाय जलविद्युत क्षेत्र में भी विस्तार कर रही है. कंपनी को उत्तराखंड स्थित 330 मेगावाट के अलकनंदा हाइड्रोपावर प्लांट की मालिक और संचालक GVK Energy Limited की दिवाला समाधान प्रक्रिया में सफल समाधान आवेदक घोषित किया गया है. इस प्रक्रिया के तहत अधिग्रहण पूरा होने पर कंपनी को जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में प्रवेश का मौका मिलेगा.

इसके अलावा, अडानी पावर और भूटान की सरकारी कंपनी Druk Green Power Corporation Limited ने 770 मेगावाट की चमकारछू जलविद्युत परियोजना विकसित करने के लिए शेयरधारक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह परियोजना भूटान की राजधानी थिम्पू में स्थापित की जानी है. इसके लिए बनाई गई संयुक्त इकाई में अडानी पावर की हिस्सेदारी 49 फीसदी और Druk Green Power Corporation की हिस्सेदारी 51 फीसदी होगी.

दोनों कंपनियां इससे पहले 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना पर भी साथ काम कर रही हैं. नई परियोजना के जरिए दोनों का सहयोग आगे बढ़ेगा.

कोरबा परियोजना में भी अहम प्रगति

कंपनी ने छत्तीसगढ़ के कोरबा फेज-II प्रोजेक्ट की पहली 660 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल यूनिट का ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन भी पूरा कर लिया है. इस प्रक्रिया में बिजली उत्पादन इकाई को बिजली ग्रिड के साथ तालमेल में लाया जाता है, ताकि निर्धारित तकनीकी शर्तों के तहत बिजली की आपूर्ति की दिशा में आगे बढ़ा जा सके.

इसके साथ ही CARE Ratings और India Ratings ने अडानी पावर की क्रेडिट रेटिंग को ‘AA; Stable’ से बढ़ाकर ‘AA+; Stable’ कर दिया है. रेटिंग एजेंसियों ने कंपनी के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार में विविधता, भविष्य में होने वाली आय की संभावनाओं और वित्तीय लचीलेपन जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा है.

कंपनी की 10 पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के अडानी पावर में विलय की योजना भी 25 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई. इसमें कोरबा पावर लिमिटेड और विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं.

कंपनी की आगे की रणनीति क्या है?

अडानी पावर के CEO एस. बी. ख्यालिया के मुताबिक, कंपनी का ध्यान देश की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद और समय पर बिजली उपलब्ध कराने पर है. उन्होंने कहा कि कंपनी भारत में नई थर्मल पावर क्षमता जोड़ने की दिशा में काम कर रही है और 2032 तक 100 गीगावाट नई थर्मल पावर क्षमता की जरूरत को पूरा करने में योगदान देना चाहती है.

Shreyansh Choubey

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