सरकार द्वारा चावल शिपमेंट पर अधिकांश प्रतिबंध हटाले के बाद चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान भारत के कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का निर्यात साल दर साल 11% से अधिक बढ़कर 17.77 अरब डॉलर पहुंच गया. वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCIS) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 25 के पहले नौ महीनों में चावल का निर्यात पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 6.44 अरब डॉलर की तुलना में 19% से अधिक की तेज वृद्धि के साथ 8.72 अरब डॉलर पहुंच गया.
पिछले साल सितम्बर तक सरकार ने बासमती और गैर-बासमती चावल के निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य और निर्यात शुल्क सहित लगभग सभी प्रतिबंध हटा दिए थे.
निर्यातकों का कहना है कि वैश्विक मांग में मजबूती के कारण पूरे वित्त वर्ष 25 में चावल के निर्यात में 10% की वृद्धि देखी जा सकती है. वित्त वर्ष 24 में भारत ने 10.41 अरब डॉलर का चावल भेजा, जो पिछले साल की तुलना में 6.5% कम है, क्योंकि घरेलू आपूर्ति में सुधार के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के कारण शिपमेंट में बाधा आई थी. अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में टूटे हुए चावल के निर्यात पर प्रतिबंध है.
पंजाब में बासमती चावल के प्रमुख निर्यातक जोसन ग्रेन्स के एमडी रंजीत सिंह जोसन ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को बताया, “चालू वित्त वर्ष में 50 लाख टन के निर्यात लक्ष्य के साथ भारत ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया है, जो सालाना 10 लाख टन से भी कम निर्यात करता है.”
निर्यातकों का कहना है कि ईरान को शिपमेंट के भुगतान के निपटान से संबंधित मुद्दों के बावजूद बासमती चावल की वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है. व्यापार सूत्रों का कहना है कि विशेष रूप से अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में शिपमेंट में तेजी के साथ वैश्विक चावल व्यापार में भारत का प्रभुत्व बहाल होने की संभावना है. भारत पिछले दशक से चावल का सबसे बड़ा निर्यातक रहा है.
अप्रैल-दिसंबर के दौरान भैंस के मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 10% से अधिक बढ़कर 3.64 अरब डॉलर हो गया, जबकि वित्त वर्ष 24 की इसी अवधि में यह 3.3 अरब डॉलर था.
अधिकारियों ने कहा कि पिछले एक दशक में इसकी क्वालिटी और पोषक मूल्य के कारण दुनिया भर में भारतीय गोजातीय मांस (Bovine Meat) की मांग में वृद्धि हुई है क्योंकि भैंस के मांस को विश्व पशु स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी जोखिमों को ध्यान में रखकर संसाधित और निर्यात किया जाता है. वित्त वर्ष 25 के पहले नौ महीनों में ताजे फलों और सब्जियों की शिपमेंट 5% से अधिक बढ़कर 2.65 अरब डॉलर हो गई और अनाज की तैयारी 10% से अधिक बढ़कर 2.03 अरब डॉलर हो गई.
कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 26.56 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य निर्धारित किया है. कृषि उत्पादों के कुल शिपमेंट में APEDA बास्केट के अंतर्गत आने वाले उत्पादों के निर्यात का हिस्सा लगभग 51% है. शेष कृषि उत्पाद निर्यात में समुद्री, तम्बाकू, कॉफी और चाय शामिल हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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