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8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट, अप्रैल तक गठन संभव, वित्तीय असर 2026 से होगा

वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव (Expenditure secretary) मनोज गोविल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उनको उम्मीद है कि पूंजीगत व्यय (Capital expenditure) की गति तेज होगी और इसके संकेत पहले से ही नजर आने लगे हैं. एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि 8वां वेतन आयोग अप्रैल तक गठित हो सकता है.

सरकार ने वेतन आयोग के प्रभाव का अनुमान लगाया है. अगले वित्तीय वर्ष (2024-25) में इस आयोग का कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा. आयोग बनने के बाद रिपोर्ट तैयार करने में समय लगेगा, जिसे सरकार को आगे प्रक्रिया में लाना होगा. आर्थिक प्रभाव 2026-27 के वित्तीय वर्ष से देखने को मिलेगा.

वेतन आयोग का गठन कब होगा?

मनोज गोविल के अनुसार, अप्रैल 2024 तक आयोग का गठन संभव है. फिलहाल गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से वेतन आयोग के संदर्भ की शर्तों (ToR) पर सुझाव मांगे गए हैं. इनके सुझाव मिलते ही अंतिम रूप से इसे तैयार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

विशेषज्ञ समिति के अनुसार, वेतन आयोग के लागू होने पर सरकार पर हर साल ₹6,250 करोड़ का बोझ आएगा. साथ ही, राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के पूर्व पेंशनभोगियों को एकीकृत पेंशन योजना (UPS) का लाभ दिए जाने के कारण पहले साल में ₹800 करोड़ अतिरिक्त खर्च होगा. इस तरह पहले साल में सरकार को ₹7,000 करोड़ का वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा. अगले साल यह खर्च ₹6,250 करोड़ से अधिक होगा, क्योंकि महंगाई भत्ता (DA) और वेतन वृद्धि स्वाभाविक रूप से बढ़ती रहती है.

क्या कर्मचारी UPS को अपनाएंगे?

निश्चित पेंशन योजना (UPS) कर्मचारियों के लिए आकर्षक विकल्प है. UPS पूरी तरह से महंगाई से सुरक्षित है, जबकि NPS के तहत कर्मचारी को जो पेंशन मिलती है, वह महंगाई के प्रभाव से मुक्त नहीं होती. हालांकि, सरकार इसे वैकल्पिक प्रणाली के रूप में लागू करेगी और कर्मचारियों को अपनी पसंद चुनने का मौका मिलेगा.

क्या राज्य सरकारें भी UPS अपनाएंगी?

कुछ राज्यों ने तो गजट अधिसूचना (Gazette Notification) से पहले ही UPS को अपनाने की इच्छा जताई थी. पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने इसके लिए ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी कर दिया है. सुझावों के आधार पर अंतिम नियम बनाए जाएंगे और फिर कर्मचारियों से उनकी पसंद पूछी जाएगी. केंद्र सरकार के नियम लागू होते ही अधिकांश राज्य सरकारें भी इसे अपनाने के लिए आगे आएंगी. राज्यों के लिए PFRDA एक अलग तंत्र विकसित करेगा, जिससे वे भी अपने कर्मचारियों के लिए UPS लागू कर सकें.


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-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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