US Iran Conflict Petrol Price: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सीधे महायुद्ध ने अब पूरी दुनिया के आर्थिक बाजार में एक भयंकर तबाही (Crude Oil Price Hike) ला दी है. खाड़ी देशों में सीजफायर की डोर टूटने और अमेरिकी मिसाइल हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक ऐसा अप्रत्याशित भूचाल आया है जिसने ग्लोबल इकोनॉमी को हिलाकर रख दिया है. सिर्फ पिछले 72 घंटों के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की आग लगा देने वाली तेजी दर्ज की जा चुकी है.
हैरान करने वाली बात यह है कि महज तीन दिन पहले तक जो क्रूड ऑयल लगातार सस्ता हो रहा था, वह अब रॉकेट की रफ्तार से ऊपर भाग रहा है. इस अचानक बदले खेल ने भारत सहित उन सभी विकासशील देशों की रातों की नींद(Petrol-Diesel Price India) उड़ा दी है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 70 फीसदी से ज्यादा कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं.
करीब 72 घंटे पहले तक वैश्विक बाजार के हालात पूरी तरह सामान्य नजर आ रहे थे. खाड़ी देशों का कच्चा तेल 72 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ चुका था, जिसके बाद दुनिया की तमाम बड़ी ब्रोकरेज फर्मों और आर्थिक जानकारों ने क्रूड के दामों में और बड़ी गिरावट का अनुमान लगाना शुरू कर दिया था. लेकिन बुधवार रात जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए घातक हमलों का ग्रीन सिग्नल दिया, बाजार का पूरा गणित एक झटके में बिगड़ गया.
दोनों ही मुख्य क्रूड बेंचमार्क पिछले ढाई हफ्तों के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं. बुधवार के ट्रेडिंग सेशन के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अचानक 5 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाकर 80 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया, जिससे चारों तरफ हड़कंप मच गया.
वैश्विक बाजार की मौजूदा स्थिति को देखें तो खाड़ी देशों का कच्चा तेल इस समय करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेंड कर रहा है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी क्रूड भी एक दिन पहले 76 डॉलर के पीक पर पहुंचने के बाद अब 74.48 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. अगर बीते 6 जुलाई से तुलना करें तो ब्रेंट क्रूड के दाम में 9 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की सीधी बढ़ोतरी हो चुकी है.
बाजार के जानकारों का साफ कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अंतरिम समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित करने के बाद तेल के दामों को असली हवा मिली है. निवेशकों में इस बात का भारी डर बैठ गया है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का तेल सप्लाई रूट पूरी तरह ब्लॉक हो गया, तो आने वाले दिनों में यह कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं.
इस अंतरराष्ट्रीय खेल का सबसे बड़ा और सीधा झटका भारतीय मिडिल क्लास और आम उपभोक्ताओं को लगने जा रहा है. दरअसल, कुछ दिन पहले तक जब कच्चा तेल लगातार सस्ता हो रहा था, तब देश के आर्थिक एक्सपर्ट्स यह कयास लगा रहे थे कि केंद्र सरकार अगस्त के दूसरे पखवाड़े से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो से तीन रुपये तक की बड़ी कटौती कर सकती है. लेकिन अब जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में कटौती की सारी संभावनाएं लगभग पूरी तरह से खत्म हो गई हैं.
हालांकि, सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने गुरुवार को देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह तेजी ऐसे ही जारी रही तो आने वाले दिनों में भारतीय कंपनियों पर खुदरा दाम बढ़ाने का भारी दबाव बनने लगेगा.
कच्चे तेल के इस तरह अचानक महंगे होने से भारत के सामने एक नया आर्थिक संकट (Petrol-Diesel Price hike India)खड़ा होने की कगार पर है. क्रूड ऑयल महंगा होने की वजह से देश का इंपोर्ट बिल बहुत तेजी से बढ़ेगा, जिससे देश का ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा एक बार फिर से बेकाबू हो सकता है.
इसके अलावा, तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय भुगतान करने के लिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार से भारी मात्रा में डॉलर बाहर भेजने होंगे, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी आने का खतरा भी पैदा हो गया है. सीधे शब्दों में कहें तो अमेरिका और ईरान की यह जंग न सिर्फ खाड़ी देशों को तबाह कर रही है, बल्कि भारत जैसे बड़े विकासशील देश की आर्थिक रिकवरी की रफ्तार पर भी एक बड़ा ब्रेक लगाने का काम कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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