Iran-US War Live News: पश्चिम एशिया में शांति की आखिरी उम्मीद भी अब पूरी तरह राख हो चुकी है. अमेरिका और ईरान के बीच हुआ नाजुक सीजफायर आधिकारिक रूप से टूट गया है और दोनों देश एक बार फिर सीधे युद्ध के मैदान में आमने-सामने हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ ऐलान कर दिया है कि ईरान के साथ सीजफायर की डोर अब खत्म हो चुकी है. बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात अमेरिकी नौसेना और जमीनी बलों ने मिलकर दक्षिणी ईरान में ऐसा खौफनाक और विनाशकारी प्रहार किया, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है.
बता दें कि इस कार्रवाई (US attack on Iran) में ईरान के सैन्य ठिकानों से लेकर रेलवे पुल तक को मिसाइलों से उड़ा दिया गया है, जिसकी गूंज और दहशत से पड़ोसी देश बहरीन तक में सायरन बजने लगे हैं. आइए समझते हैं कि कैसे एक झटके में खाड़ी देशों का पूरा कूटनीतिक गणित बिगड़ गया है.
इस पूरे जियोपॉलिटिकल भूचाल की शुरुआत 6 और 7 जुलाई को हुई. जब दुनिया को लग रहा था कि दोनों देशों के बीच शांति बहाल हो रही है, तभी ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कम से कम तीन बड़े कमर्शियल जहाजों और ऑयल टैंकरों को अपना निशाना बना लिया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वो सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है.
ईरान की इस हरकत को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कानून और सीजफायर का सीधा व खुला उल्लंघन माना. राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की इस घेरेबंदी को अमेरिकी व्यापार और संप्रभुता पर हमला करार देते हुए तुरंत सबसे बड़ी सैन्य स्ट्राइक का ग्रीन सिग्नल दे दिया.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम (CENTCOM) ने बिना कोई समय गंवाए दक्षिणी ईरान में कहर बरपाना शुरू कर दिया. अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों और फाइटर जेट्स ने रातभर ईरान के 80 से ज्यादा बेहद रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर भयानक प्रिसीजन स्ट्राइक की.
अमेरिका ने अपने इस डबल अटैक (US Iran Strike) में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल रडार, एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम, आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की घातक फास्ट अटैक बोट्स और मुख्य कमांड सेंटर्स को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया. हमलों का दायरा इतना व्यापक था कि मिसाइलों ने ईरान के महत्वपूर्ण रेलवे पुलों को भी जमींदोज कर दिया, ताकि उसकी सैन्य सप्लाई चेन को पूरी तरह से काटा जा सके.
अमेरिकी बमबारी का खौफ ईरान के पूरे दक्षिणी तटीय इलाके में देखा गया. ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंदर अब्बास, कोनारक और भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम चाबहार पोर्ट के आसपास के इलाकों में रातभर भयंकर धमाकों की आवाजें सुनी गईं.
वहीं हालात इतने ज्यादा तनावपूर्ण हो गए कि ईरान के पड़ोसी और अमेरिकी सैन्य बेस वाले देश बहरीन में खतरे के सायरन बजने लगे. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह हालात अभी भी बेहद डायनामिक हैं और अगर ईरान ने पलटवार करने की जुर्रत की, तो यह सैन्य कार्रवाई आगे भी इसी आक्रामक रफ्तार से जारी रहेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी कार्रवाई (US attack on Iran) के बाद ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बंधक बनाने या निशाना बनाने की कोशिश की, तो अमेरिका का अगला जवाब पहले से भी कहीं ज्यादा क्रूर और सख्त होगा.
यह हमला दरअसल पूरी दुनिया को अमेरिका का यह संदेश है कि वो वैश्विक नौवहन की आजादी (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) को चुनौती देने वाली किसी भी ताकत को कुचलने से पीछे नहीं हटेगा. अब दुनिया की नजरें ईरान के सुप्रीम लीडर और उनकी सेना पर टिकी हैं कि वे इस विनाशकारी हमले का क्या और कैसे जवाब देते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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