बिजनेस

ट्रंप की पार्टी हारी तो चमकने लगा सोना, क्या धनतेरस पर खरीदारी का सही मौका है? समझिए पूरा खेल

Gold Price On Dhanteras: धनतेरस से ठीक पहले सोने की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल रही है. कुछ दिन पहले तक सोने के भाव गिरने का अनुमान लगाने वाले एक्सपर्ट अब इसकी कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस धनतेरस पर सोना खरीदना सही फैसला होगा? क्या सिर्फ परंपरा निभाने के लिए नहीं, बल्कि निवेश के लिहाज से भी अभी सोना खरीद लेना चाहिए? सोने की कीमतों में अचानक आई तेजी के पीछे घरेलू मांग से ज्यादा अमेरिका की राजनीति और डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी की चुनावी हार को अहम वजह माना जा रहा है.

दरअसल, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है. इसके बाद अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट के संकेत मिले हैं. इसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ रहा है. लेकिन यह पूरा मामला समझने के लिए पहले जानना जरूरी है कि पिछले कुछ महीनों में सोने के भाव क्यों गिर रहे थे.

ट्रंप की पार्टी की हार से सोने की कीमतों का क्या कनेक्शन?

इस साल की शुरुआत में सोने का भाव 1.75 लाख रुपये के पार पहुंच रहा था, लेकिन अक्टूबर आते-आते यह 1.5 लाख रुपये से नीचे आ गया. उस समय इसकी बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड को बताया जा रहा था.

अमेरिका में बॉन्ड सरकार की ओर से लिया गया कर्ज होता है. जब अमेरिकी सरकार बाजार से पैसा उधार लेती है तो इसके बदले बॉन्ड जारी करती है. इसमें तय होता है कि सरकार कितने समय बाद पैसा लौटाएगी और निवेशक को कितना ब्याज मिलेगा. अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न को 10 साल की बॉन्ड यील्ड कहा जाता है.

जब यह यील्ड बढ़ती है तो बड़े निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड आकर्षक हो जाते हैं. इसकी वजह यह है कि अमेरिकी सरकार के बॉन्ड को दुनिया के सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है. दूसरी तरफ सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता. इसलिए जब बॉन्ड पर अच्छा रिटर्न मिलने लगता है तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाने लगते हैं. यही वजह थी कि पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ था.

ईरान युद्ध ने बढ़ाई अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध ने भी इस पूरे समीकरण को प्रभावित किया. युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया. ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज का रास्ता रोके जाने से तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी. इससे महंगाई का दबाव भी बढ़ने लगा.

दूसरी तरफ युद्ध पर अमेरिका का खर्च बढ़ रहा था. सरकार को इस खर्च के लिए या तो टैक्स से पैसा जुटाना था या फिर बाजार से कर्ज लेना था. ऐसे हालात में अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड भी बढ़ने लगी. यह एक समय 5 फीसदी से ऊपर पहुंच गई थी.

जब निवेशकों को अमेरिकी बॉन्ड में करीब 5 फीसदी या उससे ज्यादा रिटर्न मिलने लगा तो उन्होंने सोने के बजाय बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा पसंद किया. इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ा. विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से भी पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में निवेश किया.

ट्रंप की चुनावी हार ने बदल दिया निवेशकों का नजरिया

अब अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है. डेमोक्रेटिक पार्टी को संसद के दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद ट्रंप के लिए अपने फैसलों को लागू करना पहले जितना आसान नहीं रह जाएगा.

आकलन यह है कि ट्रंप अब टैक्स में बड़ी कटौती या सरकारी खर्च बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव आसानी से पास नहीं करा पाएंगे. ईरान युद्ध के लिए भी उन्हें संसद से पैसा जुटाने में मुश्किल हो सकती है. ऐसे में युद्ध को जल्द खत्म करने का दबाव बढ़ सकता है.

इसका असर अमेरिकी सरकार की उधार लेने की जरूरत पर भी पड़ सकता है. अगर सरकार को पहले के अनुमान के मुकाबले कम कर्ज लेना पड़ेगा तो उसे कम बॉन्ड जारी करने होंगे. बाजार में बॉन्ड की मांग और सप्लाई के समीकरण में बदलाव से उनकी यील्ड नीचे आ सकती है.

यही वजह है कि निवेशकों के बीच अब अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट का अनुमान मजबूत हुआ है. इसका सीधा फायदा सोने को मिल सकता है.

क्या अब फिर बढ़ेंगे सोने के भाव?

अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5 फीसदी के पार जाने के बाद अब करीब 4.85 फीसदी पर आ गई है. यह पिछले दो महीनों का निचला स्तर बताया जा रहा है. बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न कम होने की उम्मीद से बड़े निवेशक फिर सोने की तरफ रुख कर सकते हैं.

यहां एक बात समझना जरूरी है कि सोने की कीमतों को सिर्फ धनतेरस या शादी के सीजन में आम लोगों की खरीदारी तय नहीं करती. बड़े बैंक, केंद्रीय बैंक, अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनियां और पेंशन फंड भी सोने के बाजार में बड़ी भूमिका निभाते हैं. ये संस्थाएं एक बार में टनों के हिसाब से सोने में निवेश कर सकती हैं. इसलिए इनके निवेश का रुख बदलने से कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है.

अगर अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट जारी रहती है और बड़े निवेशक सोने में पैसा लगाते हैं तो सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है. हालांकि, आने वाले दिनों में ईरान युद्ध का रुख और अमेरिकी आर्थिक नीतियां भी सोने की कीमतों को प्रभावित करेंगी.

शेयर बाजार में भी क्यों दिख रही तेजी?

अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट का असर सिर्फ सोने पर ही नहीं, शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है. पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगा रहे थे. अब बॉन्ड पर रिटर्न घटने की उम्मीद के बीच विदेशी निवेशकों के फिर से शेयर बाजारों की ओर लौटने की संभावना जताई जा रही है.

इसी वजह से भारतीय शेयर बाजार में भी तेजी की उम्मीद बढ़ी है. यानी अमेरिका की राजनीति में हुए बदलाव का असर सोने से लेकर शेयर बाजार तक दिखाई दे सकता है.

तो क्या धनतेरस पर सोना खरीदना चाहिए?

धनतेरस पर सोना खरीदने का फैसला सिर्फ परंपरा के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी जरूरत और निवेश की योजना को ध्यान में रखकर करना चाहिए. मौजूदा हालात में सोने की कीमतों को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से समर्थन मिलने की उम्मीद है. ऐसे में आने वाले कुछ महीनों में सोने के भाव में बड़ी गिरावट की संभावना पहले के मुकाबले कम मानी जा रही है.

हालांकि, सोना कितना ऊपर जाएगा और तेजी कितने समय तक बनी रहेगी, यह अभी साफ नहीं है. ईरान युद्ध, तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और बड़े निवेशकों का रुख आगे बाजार की दिशा तय करेंगे.

ये भी पढ़ें- Gold Silver Price Today: धनतेरस से ठीक पहले सोने-चांदी में तूफानी तेजी: 5500 रुपये तक चढ़े दाम, खरीदारी से पहले चेक कर लें नए रेट्स

ट्रंप की पार्टी की चुनावी हार ने अमेरिकी आर्थिक नीतियों को लेकर निवेशकों का आकलन बदल दिया है. इसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ रहा है. इसलिए इस धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले बाजार की चाल और अपनी निवेश क्षमता को समझना जरूरी है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

गोविंद सिंह बिहार के कैमूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हासिल की और पटना कॉलेज, पटना से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, कंटेंट एडिटिंग, रिसर्च और न्यूज प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया। फिलहाल वह भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस विदेश नीति, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार से जुड़े मुद्दों पर है।

Recent Posts

Aaj Ka Rashifal 6 November 2026: चंद्रमा-शुक्र का संयोग, सिंह समेत 8 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन लाभ के योग

Aaj Ka Rashifal 6 November 2026: 6 नवंबर को चंद्रमा और शुक्र कन्या राशि में…

53 minutes ago

Dhanteras Special: धन का धर्म और मर्म- धन्वन्तरि, लक्ष्मी-नारायण और कुबेर की कथाओं से समझें क्या है असली समृद्धि

Dhanteras 2026: धन का धर्म और मर्म. धनतेरस पर भगवान धन्वन्तरि, श्री लक्ष्मी-विष्णु और कुबेर…

1 hour ago

Dhanteras 2026: धनतेरस पर क्यों खरीदते हैं नई चीजें? जानें खरीदारी का मुहूर्त और ‘यम दीप’ की मान्यता

Dhanteras kab hai: धनतेरस न केवल भौतिक वस्तुओं की खरीदारी का, बल्कि आरोग्य और सुरक्षा…

3 hours ago