अमेरिका जापान की डील टूटी
US Japan Trade Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ‘अमेरिका फर्स्ट’ वाली नीति को जापान ने करारा झटका दिया है. अमेरिका और जापान के बीच होने वाली 48 लाख करोड़ (550 बिलियन डॉलर) की एक बड़ी डील सिर्फ इसलिए रुक गई क्योंकि दोनों देशों के बीच चावल (Rice Role In US Japan Deal) को लेकर सहमति नहीं बन पाई. यह खबर ऐसे मौके पर आ रही है जब भारत पर लाए डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ की चर्चा दुनिया में हो रही है. वहीं पीएम मोदी भी जापान (PM Modi Japan Visit) के दौरे पर हैं. यह डील किस कारण टूटी इसे लेकर कुछ पुख्ता तरीके से नहीं कहा जा रहा है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इसके पीछे चावल का दाना है.
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जापान पर 25% टैरिफ लगाया था. हालांकि, बाद में इसे घटाकर करने का वादा किया था. अपने वादे के साथ उन्होंने इतनी शर्तें लगाई थी कि जापान को बात कुछ रास नहीं आई. सौदे की शर्तों पर जापान ने आपत्ति जताई. यह रुकावट भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Japan Visit) के लिए एक बड़ा अवसर पैदा कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब भारत और जापान के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं.
अमेरिका और जापान के बीच 550 अरब डॉलर की मेगा डील होते-होते रह गई है. इस डील के तहत जापान में अमेरिकी निवेश बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन यह डील अब चावल के मुद्दे पर अटक गई है. अमेरिका और जापान के बीच सहमति बनी थी कि अगर जापान 550 अरब डॉलर का मेगा निवेश करता है, तो टोक्यो पर लगने वाले टैरिफ 25% से घटाकर 15% कर दिए जाएंगे. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका इस निवेश का 90% मुनाफा अपने पास रखेगा, जिसे जापान ने स्वीकार नहीं किया.
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इस पूरे मामले में जापानी चावल की अहम भूमिका है. जापानी किसान अमेरिकी चावल के आयात के खिलाफ हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह सस्ता चावल उनके बाजार को खत्म कर देगा. जापानी लोग स्टिकी राइस खाते हैं और इसे पौष्टिक मानते हैं. चावल जापान में सांस्कृतिक पहचान भी है, और जापानी लोग इसे अपने गांव से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि जापान अपने लोगों के हितों और संस्कृति को देखते हुए इस डील से पीछे हट गया. क्योंकि, वह नहीं चाहता कि उसके बाजार में अमेरिका का चावल आए.
जापान का चावल आयात पहले से ही कम है, और अगर जापान अमेरिकी चावल का आयात नहीं करता है. ऐसे में भारत से उसकी डील हो सकती है. भारत का जापान में चावल का निर्यात पिछले दो सालों में बढ़ा है. साल 2024 में जापान ने भारत से 5.74 मिलियन डॉलर का चावल आयात किया है. इन दिनों पीएम मोदी जापान के दौरे (PM Modi Japan Visit) पर भी हैं. ऐसे यह मौका और भी बड़ा हो सकता है.
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ट्रंप की यह चाल उल्टी पड़ गई, क्योंकि जापान ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और घरेलू किसानों को अमेरिकी चावल के सस्ते आयात से बचाने के लिए अरबों डॉलर का समझौता ठुकरा दिया. यह न सिर्फ ट्रंप की व्यापार नीति की नाकामी को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि हर देश के लिए सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं होता. ऐसे में, यह भारत के लिए एक बड़ा मौका है. पिछले दो सालों में भारत का जापान को चावल निर्यात दोगुने से ज्यादा हो गया है. प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi Japan Visit) से प्रभावित होकर जापान अब भारत के साथ मिलकर एक मजबूत और स्थायी व्यापारिक साझेदारी बना सकता है.
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