लखनऊ: उत्तर प्रदेश में किसानों की तरक्की का एक नया संकेत सामने आया है. राज्य सरकार के अनुसार, वर्ष 2016-17 में जहां ट्रैक्टरों की संख्या 88,000 थी, वहीं 2024-25 तक यह आंकड़ा बढ़कर 1,42,200 पहुंच गया है. यानी ट्रैक्टरों की खरीद में 62% से भी अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है.
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह बढ़ोत्तरी किसानों की बढ़ती आय और आधुनिक खेती की ओर उनके रुझान का परिणाम है. उन्होंने कहा, “अब ट्रैक्टर केवल खेत जोतने के लिए नहीं रह गए हैं. इन्हें भूमि समतल करने, खाद और कीटनाशकों के छिड़काव, मेड़ बनाने, बीज बोने, आलू की खुदाई, और फसल अवशेष प्रबंधन जैसे कई कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है.”
सरकार द्वारा ट्रैक्टर से चलने वाले कृषि उपकरणों पर लगभग 50% तक की सब्सिडी दी जा रही है. इससे किसानों की मेहनत और समय दोनों की बचत हो रही है और खेती के काम पहले से कहीं ज्यादा कुशल और कम खर्चीले हो गए हैं. ऐसे प्रयासों से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ी है बल्कि राज्य में ट्रैक्टरों की मांग भी लगातार बढ़ रही है.
राष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रैक्टरों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखा गया है. मौजूदा वित्तीय वर्ष में देशभर में 10 लाख ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री होने की उम्मीद है. इससे पहले 2023-24 में 9,39,713 ट्रैक्टर बिके थे, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि किसानों का हित उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रदेश की कृषि क्षमता को रेखांकित करते हुए उन्होंने यूपी को देश की “खाद्य टोकरी” बनाने की दिशा में काम करने की बात कही है. राज्य की नौ कृषि-जलवायु क्षेत्र, उपजाऊ गंगा-घाटी, भरपूर जल संसाधन और बड़ी श्रमिक आबादी इसे कृषि क्षेत्र में अग्रणी बना सकते हैं.
सरकार पारंपरिक खेती को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर जोर दे रही है. इसके लिए ‘कृषि विज्ञान केंद्रों’ और ‘एक करोड़ किसान स्कूल’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीक और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जा रही है.
इसके अलावा, लंबे समय से रुके हुए सिंचाई परियोजनाएं जैसे बाणसागर परियोजना, राष्ट्रीय सरयू नहर परियोजना और अर्जुन सहायाक परियोजना को पूरा कर लिया गया है. इससे सिंचाई की क्षमता में काफी बढ़ोतरी हुई है. साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं और धान की खरीद के लिए पारदर्शी व्यवस्था, समय पर भुगतान और मिलेट्स जैसे नए फसलों को MSP में शामिल किया गया है.
प्रदेश के करीब 50 लाख गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, चीनी मिलों का आधुनिकीकरण, नई मिलों की स्थापना, क्रशिंग सीजन का विस्तार और पीएम-किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है. साथ ही, बीज और उर्वरक की समय पर उपलब्धता ने किसानों की आय को बढ़ाने में मदद की है.
इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में दालों और तिलहन की पैदावार में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली है. राज्य सरकार का मानना है कि इसी रफ्तार से आगे बढ़ते हुए यूपी जल्द ही देश की अग्रणी कृषि शक्ति बन सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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