बिजनेस

पढ़ाई या बड़ा बिजनेस मॉडल? जानिए देश की जीडीपी और अर्थव्यवस्था के लिए कितने जरूरी हो चुके हैं कोचिंग सेंटर्स

Coaching Centers India: भारत की कोचिंग इंडस्ट्री आज ₹60,000 करोड़ से अधिक के आर्थिक तंत्र में बदल चुकी है, जिससे सरकार को सालाना ₹5,500 करोड़ से ज्यादा का GST मिल रहा है. पटना विवाद के बाद इस सेक्टर की बेतहाशा बढ़ती फीस, विज्ञापनों की होड़ और छात्रों पर बढ़ते मानसिक तनाव को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है.

देश में लगभग 27% छात्र कोचिंग पर निर्भर हैं, जिसे नियंत्रित करने के लिए अब सरकार को भी नई गाइडलाइंस जारी करनी पड़ी हैं (Patna Coaching Controversy).

हालिया पटना विवाद ने साफ कर दिया है कि देश में कोचिंग अब पढ़ाई का माध्यम नहीं, बल्कि सालाना ₹5,500 करोड़ से ज्यादा का GST देने वाला एक तगड़ा आर्थिक तंत्र बन चुकी है. सरकारी खजाने को अरबों का टैक्स देने और लाखों रोजगार पैदा करने वाली इस चमकती इंडस्ट्री के पीछे भारी-भरकम फीस, विज्ञापनों में टॉपर्स की ‘खरीद-फरोख्त’ और छात्रों पर बढ़ता जानलेवा मानसिक दबाव असली विलेन हैं.

इसी कमर्शियल अराजकता पर लगाम कसने के लिए अब सरकार को भी सख्त गाइडलाइंस के साथ मैदान में उतरना पड़ा है.”

शिक्षा से बिजनेस मॉडल का सफर

पिछले एक दशक में भारत में कोचिंग सेंटर्स का चलन असाधारण रूप से बढ़ा है. जो कोचिंग कभी केवल कमजोर बच्चों के लिए एक सहारा मानी जाती थी, वह आज IIT-JEE, NEET, UPSC और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं के लिए एक अनिवार्य जरूरत बन चुकी है. आज यह सेक्टर देश में करीब ₹60,000 करोड़ का विशाल बाजार रूप ले चुका है, जिसका सीधा असर परिवारों के बजट और शहरों की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है.

अरबों का कारोबार और सरकारी टैक्स (Coaching Industry Turnover)

इस इंडस्ट्री की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले बिहार में इसका कारोबार ₹15,000 करोड़ का है. ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यमों ने मिलकर इसे और रफ्तार दी है. इस कमाई से सरकारी खजाने को भी बड़ा फायदा हो रहा है; वित्त मंत्रालय के अनुसार, कोचिंग संस्थानों से मिलने वाला GST कलेक्शन 2019-20 के ₹2,240 करोड़ से ढाई गुना बढ़कर 2023-24 में ₹5,517 करोड़ से अधिक हो गया है.

छात्रों की निर्भरता और गंभीर चुनौतियां

आज देश के लगभग 27% छात्र कोचिंग पर निर्भर हैं, जबकि त्रिपुरा (79%) और पश्चिम बंगाल (75%) जैसे राज्यों में यह आंकड़ा और भी भयावह है. हालांकि, इस आर्थिक चमक के पीछे भारी-भरकम फीस, मानसिक तनाव और टॉपर्स को खरीदने की विज्ञापनी होड़ जैसी गंभीर समस्याएं छिपी हैं. इसी बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 2024 में कोचिंग्स के लिए सख्त गाइडलाइंस भी जारी की हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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