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भारत-जर्मनी अकादमिक सहयोग को नई ऊंचाई, 80 से अधिक जर्मन विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों का भारत दौरा

भारत और जर्मनी के बीच अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से, 80 से अधिक जर्मन विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों का एक प्रतिनिधिमंडल इस महीने भारत का दौरा कर रहा है. जर्मन अकादमिक एक्सचेंज सर्विस (DAAD) की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस महत्वपूर्ण यात्रा की पुष्टि की गई है.

इस दौरान जर्मन प्रतिनिधिमंडल भारतीय विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण चर्चाओं में भाग लेगा. वे कोयंबटूर में PSG कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी में जर्मन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के उद्घाटन, “इंडो-जर्मन फोरम: रिसर्च, इनोवेशन और ट्रांसफर” कार्यक्रम और नई दिल्ली में होने वाले APAIE सम्मेलन 2025 में भी शामिल होंगे.  यह दौरा DAAD के भारत में 65 साल पूरे होने के जश्न के साथ भी मेल खाता है. इस मौके पर जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन भी मौजूद रहेंगे.

भारत-जर्मनी के बीच मजबूत होता अकादमिक सहयोग

जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने इस अवसर पर कहा, “भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है. यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. जर्मनी में लगभग 50,000 भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं, जो किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक हैं. भारतीय वैज्ञानिक अपने कौशल, महत्वाकांक्षाओं और खोजों के माध्यम से हमारे शोध जगत में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. यह देखकर खुशी होती है कि यह सहयोग हर साल तेजी से आगे बढ़ रहा है.”

इस यात्रा की शुरुआत 16 से 22 मार्च तक आयोजित “हायर एजुकेशन पॉलिसी इनफॉर्मेशन प्रोग्राम” से हुई, जिसमें जर्मनी के 20 प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रमुख और अकादमिक प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान हैदराबाद और नई दिल्ली में संस्थागत साझेदारी और नए अकादमिक सहयोग पर गहन विचार-विमर्श किया गया. इस पहल का उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और संयुक्त शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना है.

कोयंबटूर में जर्मन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी का उद्घाटन

प्रतिनिधिमंडल के दौरे का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, कोयंबटूर में जर्मन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी का उद्घाटन रहा. इस समारोह में जर्मनी के कई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. DAAD द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त यह पहल भारत में तकनीकी और इंजीनियरिंग शिक्षा को सशक्त बनाएगी, जिससे उद्योग-संबंधित कौशल और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा.

इंडो-जर्मन फोरम: अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान हस्तांतरण

भारत-जर्मनी के बीच अकादमिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए इंडो-जर्मन फोरम: रिसर्च, इनोवेशन और ट्रांसफर का आयोजन किया जाएगा. DAAD के नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय और जर्मन विज्ञान एवं नवाचार केंद्र (DWIH) द्वारा आयोजित इस फोरम में जर्मनी और भारत के 250 से अधिक उच्च शिक्षा और शोध संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे. यह मंच शिक्षा, नवाचार और ज्ञान हस्तांतरण में नए अवसरों को बढ़ावा देगा.

DAAD की क्षेत्रीय निदेशक, कटजा लैश ने कहा, “DAAD की शताब्दी और भारत में 65 वर्षों की उपस्थिति के अवसर पर, हम इस मजबूत साझेदारी को और आगे ले जा रहे हैं. भारत में 80 से अधिक जर्मन विश्वविद्यालयों की भागीदारी यह दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच शैक्षिक संबंधों को और गहरा करने में गहरी रुचि है. ये आयोजन हमारे उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.”

नई दिल्ली में APAIE 2025 सम्मेलन में भागीदारी

प्रतिनिधिमंडल APAIE 2025 सम्मेलन में भी भाग लेगा, जो 25 से 27 मार्च के बीच नई दिल्ली में आयोजित होगा. इस सम्मेलन में 70 से अधिक जर्मन विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भाग लेंगे और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी और शोध नेटवर्क को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. इस यात्रा में जर्मनी की ओर से भारत के साथ उच्च शिक्षा और शोध में सहयोग को आगे बढ़ाने की गहरी रुचि को दर्शाया गया है.

-भारत एक्सप्रेस 

निहारिका गुप्ता

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