India-UK Trade Deal
India-UK Trade Deal: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच लंबे समय से जिस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का इंतजार किया जा रहा था, वह अब आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है, इस व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है.
इस समझौते के बाद भारत के कई प्रमुख उद्योगों के लिए ब्रिटेन का बाजार पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा. वहीं दूसरी ओर, ब्रिटेन से आने वाले कुछ लोकप्रिय उत्पाद आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे सस्ते होने लगेंगे क्योंकि उन पर लगने वाले आयात शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी की जाएगी.
सरकार का मानना है कि इस समझौते से भारत के कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद, केमिकल और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा. इन उत्पादों के निर्यात के लिए ब्रिटेन में बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे कारोबार बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. इसका फायदा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), किसान और छोटे निर्माता भी ब्रिटेन के बाजार तक अपनी पहुंच मजबूत कर सकेंगे.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस समझौते को भारत-यूके संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा. यह भारत के कुल निर्यात मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी.
यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है. आईटी, फाइनेंशियल सर्विस, एजुकेशन, प्रोफेशनल सर्विस और बिजनेस सर्विस जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे. इसके साथ ही भारतीय प्रतिभाओं की ब्रिटेन में आवाजाही भी पहले की तुलना में अधिक आसान होने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच कौशल और सेवाओं का आदान-प्रदान बढ़ेगा.
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू सोशल सिक्योरिटी व्यवस्था भी है. इसके तहत ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को पांच वर्षों तक दोहरी सोशल सिक्योरिटी का योगदान नहीं देना होगा. इससे वहां काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों और कंपनियों पर आर्थिक बोझ कम होगा और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी.
एफटीए लागू होने के बाद ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क में चरणबद्ध कमी शुरू होगी. इसका असर आने वाले वर्षों में बाजार में दिखाई देगा. स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स और कुछ अन्य ब्रिटिश उत्पाद पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं. हालांकि इन सभी वस्तुओं पर शुल्क में कटौती एक साथ नहीं होगी, बल्कि तय समयसीमा के अनुसार धीरे-धीरे लागू की जाएगी.
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समझौते के तहत ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर वर्तमान 150 प्रतिशत आयात शुल्क को पहले चरण में घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा. इसके बाद अगले 10 वर्षों में इसे और कम करके 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा. इसी तरह ब्रिटिश ऑटोमोबाइल पर भी शुल्क में कमी की जाएगी. हालांकि यह प्रक्रिया कोटा-आधारित व्यवस्था के तहत चरणबद्ध तरीके से लागू होगी, इसलिए कारों की कीमतों में बदलाव भी धीरे-धीरे देखने को मिलेगा.
भारत और ब्रिटेन के बीच इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में कई वर्षों की बातचीत लगी. कुल 14 दौर की वार्ताओं के बाद 24 जुलाई 2025 को इस पर हस्ताक्षर किए गए थे. समझौते में 30 अलग-अलग अध्याय शामिल हैं, जिनमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, डिजिटल ट्रेड, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा, नवाचार, सरकारी खरीद और सतत विकास जैसे अहम विषयों को शामिल किया गया है.
समझौते के तहत भारत लगभग 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम करेगा या पूरी तरह समाप्त करेगा. इनमें से करीब 85 प्रतिशत टैरिफ लाइनें अगले 10 वर्षों के भीतर पूरी तरह ड्यूटी-फ्री हो जाएंगी. कुल मिलाकर, भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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