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वक्त बदल गया, जज्बात बदल गए! कभी धर्मेन्द्र प्रधान के मुरीद थे सोनम वांगचुक…आज मांग रहे इस्तीफा

देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी राजनीतिक और सामाजिक उठापटक (Sonam Wangchuk Protest) का गवाह बन रहा है. इन दिनों लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक, पर्यावरणविद और थ्री इडियट्स फिल्म के असली फुंसुख वांगडू यानी सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मामले के बाद दिल्ली में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ चुके हैं. वे शिक्षा व्यवस्था में धांधली को लेकर सीधे देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जिद पर अड़े हैं.

लेकिन इस पूरे आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक की एक पुरानी पोस्ट ने हलचल मचा दी है, जिससे उनके इस पूरे प्रदर्शन पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है. बताते चलें इंटरनेट पर जनता ने वांगचुक का एक ऐसा पुराना ट्वीट ढूंढ निकाला है, जिसमें वे इसी शिक्षा मंत्री की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे थे. इस तीखे कंट्रास्ट को देखकर सोशल मीडिया पर भारी हाहाकार मच गया है.

 

जानिए आखिर क्या है माजरा?(Sonam Wangchuk Protest)

दरअसल पूरा मामला साल 2023 के मार्च महीने का है, जब सोनम वांगचुक की मुलाकात देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से हुई थी. उस मुलाकात के बाद 16 मार्च 2023 को वांगचुक ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर शिक्षा मंत्री को टैग करते हुए उनकी जमकर तारीफ की थी. उन्होंने लिखा था कि शिक्षा में नए और इनोवेटिव आइडियाज को लेकर इतने खुले विचारों का होने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद धर्मेंद्र प्रधान जी.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा था कि वे नई शिक्षा नीति यानी NEP को जमीनी स्तर पर सच बनाने के लिए अब और भी ज्यादा प्रतिबद्ध महसूस कर रहे हैं. उस समय अनुभव-आधारित शिक्षा और सतत विकास पर दोनों के बीच बड़ी सकारात्मक चर्चा हुई थी, लेकिन आज के हालात देखकर लगता है कि गंगा पूरी तरह उलटी बह चुकी है.

पुराने ट्वीट पर भड़का नेटिजन्स का गुस्सा

जैसे ही वांगचुक जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने पहुंचे, वैसे ही डिजिटल दुनिया के एक्टिव यूजर्स ने उनका यह तीन साल पुराना ट्वीट निकालकर उन पर तीखा तंज कसना शुरू कर दिया. इस विरोधाभास को देखकर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि भाई यह तो पूरी तरह से वक्त बदल गया और जज्बात बदल गए वाला सीन हो गया है.

वहीं एक दूसरे यूजर ने बेहद तीखा व्यंग्य कसते हुए लिखा कि ये खुद अंदर से प्रधान से मिले हुए हैं और बाहर आकर हम आम जनता को पागल बना रहे हैं. जनता का कहना है कि जो व्यक्ति तीन साल पहले इसी सिस्टम और मंत्री के गुणगान कर रहा था, वह आज अचानक इतना बड़ा आंदोलनकारी कैसे बन गया.

 

आर-पार की जंग में कूदे वांगचुक

हालांकि, अपने इस विरोध प्रदर्शन (Sonam Wangchuk Protest) को लेकर सोनम वांगचुक का स्टैंड बिल्कुल साफ है. उनका कहना है कि आज देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो चुकी है और बिना जवाबदेही के देश का विकास संभव नहीं है. नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई कथित गंभीर अनियमितताओं ने देश के करोड़ों होनहार युवाओं के भविष्य को पूरी तरह अंधकार में धकेल दिया है.

वांगचुक का मानना है कि नई शिक्षा नीति 2020 को सही मायने में जमीन पर उतारने के लिए शिक्षा मंत्रालय में बहुत बड़े और बुनियादी बदलावों की जरूरत है. इसके साथ ही वे लद्दाख की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय सुरक्षा के मुद्दों को भी इस आंदोलन के जरिए पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं.

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सेकनोल के संस्थापक की साख दांव पर?

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक लद्दाख में सेकनोल संस्था के संस्थापक हैं और दुनिया भर में आइस स्टूपा जैसी बेहतरीन तकनीक के प्रणेता माने जाते हैं. उन्होंने हमेशा स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण से जुड़ी अनुभव-आधारित व्यावहारिक शिक्षा पर बल दिया है. साल 2023 में जहां सरकार और उनके बीच एक बेहतरीन सकारात्मक संवाद का माहौल था, वहीं अब परीक्षा घोटालों और नीतिगत खामियों को लेकर वे सड़क पर आ चुके हैं.

यह पूरा घटनाक्रम इस समय देश के शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही, नीति क्रियान्वयन और जनता-सरकार संवाद पर एक बहुत व्यापक बहस छेड़ रहा है. अब देखना यह होगा कि इस तीखे सोशल मीडिया ट्रोल और अनशन के बाद शिक्षा मंत्रालय और सोनम वांगचुक के बीच की यह जंग क्या नया मोड़ लेती है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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