केपीएमजी प्राइवेट एंटरप्राइज की ताज़ा वेंचर पल्स रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत में वेंचर कैपिटल (वीसी) निवेश 355 सौदों के माध्यम से बढ़कर 3.5 अरब डॉलर हो गया, जो पिछली तिमाही के 456 सौदों के माध्यम से 2.8 अरब डॉलर की वृद्धि दर्शाता है. यह वृद्धि वीसी गतिविधि में वैश्विक मंदी के बीच हुई है.
भारत में केपीएमजी के पार्टनर और नेशनल लीडर (प्राइवेट इक्विटी) नितीश पोद्दार ने कहा, “भारत के वेंचर कैपिटल सेक्टर ने 2025 की दूसरी तिमाही में लचीलापन दिखाया, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद फंडिंग में वृद्धि हुई.” उन्होंने आगे कहा, “फिनटेक, हेल्थटेक और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों ने निवेशकों की गहरी रुचि आकर्षित की, जो भारत की इनोवेशन क्षमता में विश्वास को दर्शाता है.”
भारत का फिनटेक सेक्टर दूसरी तिमाही में घरेलू वेंचर कैपिटल (Venture Capital) फ्लो में हावी रहा. उल्लेखनीय सौदों में ग्रो के लिए 200 मिलियन डॉलर और आईकेएफ फाइनेंस के लिए 172 मिलियन डॉलर के फंडिंग राउंड शामिल थे.
अमेरिका में सर्किल, चाइम और ईटोरो जैसे फिनटेक आईपीओ की हालिया सफलता वैश्विक स्तर पर निवेशकों का विश्वास बढ़ा रही है. रिपोर्ट बताती है कि भारतीय फिनटेक स्टार्टअप, खासकर परिपक्व स्टार्टअप, जल्द ही सार्वजनिक होने या अधिग्रहित होने के अवसर पा सकते हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद, यह इस क्षेत्र के लिए एक आशाजनक समय बन गया है.
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फिनटेक के अलावा, हेल्थटेक और लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप्स ने भारतीय वीसी निवेशकों के बीच अधिक आकर्षण देखा. डिजिटल स्वास्थ्य अपनाने, आपूर्ति श्रृंखला नवाचार और एआई-संचालित वर्टिकल समाधानों में बढ़ती रुचि जैसे दीर्घकालिक मैक्रो रुझानों ने इन सेक्टरों में रुचि बढ़ाई.
भारत का प्रदर्शन व्यापक एशियाई वीसी परिदृश्य के विपरीत है, जहां दूसरी तिमाही में कुल निवेश 12.8 अरब डॉलर था, जो पहली तिमाही के 12.6 अरब डॉलर से मामूली वृद्धि है. इस क्षेत्र में सौदों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई, जो 2,663 से घटकर 2,022 रह गई, जो एक दशक से भी अधिक समय में इसकी सबसे कमजोर तिमाहियों में से एक है.
एशिया भर में कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल (Venture Capital) गतिविधियां भी ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गईं, जो दूसरी तिमाही में केवल 6 अरब डॉलर तक पहुंच गईं. नीतीश पोद्दार ने कहा, “इस तिमाही का प्रदर्शन इस क्षेत्र के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर करता है.”
वैश्विक वेंचर कैपिटल निवेश 7,356 सौदों में कुल 101.05 अरब डॉलर रहा, जो पहली तिमाही के 128.4 अरब डॉलर से कम है. हालाँकि, भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, एआई, रक्षा तकनीक और वित्तीय प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में वृद्धि देखी गई.
वैश्विक फंडिंग में गिरावट का मुख्य कारण किसी असाधारण एकल लेनदेन का अभाव है, जैसे कि पहली तिमाही में ओपनएआई द्वारा 40 अरब डॉलर जुटाना.
-भारत एक्सप्रेस
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