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बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट: जनवरी-मार्च तिमाही में तेज़ हो सकती है भारत की GDP ग्रोथ

Inflation Projections: बैंक ऑफ बड़ौदा की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत की जीडीपी वृद्धि में तेजी आने की संभावना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च-आवृत्ति संकेतक (high-frequency indicators) जो आर्थिक गतिविधियों की मापदंड होते हैं, वे सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं.

रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी-फरवरी 2025 के दौरान जीएसटी संग्रहण में वृद्धि हुई है. जनवरी-फरवरी 2025 में यह औसतन 3.8 लाख करोड़ रुपये रहा, जो कि पिछले साल की समान अवधि (जनवरी-फरवरी 2024) के 3.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. इसके अलावा, ई-वे बिल जेनरेशन में भी सुधार देखा गया, जो जनवरी 2025 में 23.1 प्रतिशत तक पहुँच गया, जबकि जनवरी 2024 में यह 16.4 प्रतिशत था और तीसरी तिमाही (Q3FY25) में 16.9 प्रतिशत था. टोल संग्रहण में भी 16.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो जनवरी-फरवरी 2024 में 11.2 प्रतिशत और तीसरी तिमाही (Q3FY25) में 14 प्रतिशत था.

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनवरी-फरवरी 2025 में एयर यात्री यातायात और वाहन पंजीकरण में कुछ कमी आई है, फिर भी चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है. विशेष रूप से, कुम्भ मेला के कारण उपभोग, सेवाओं और एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) क्षेत्र में बढ़ोतरी हो सकती है, जो वृद्धि को प्रोत्साहित करेगा.

पूर्ण वित्तीय वर्ष के लिए, बैंक ऑफ बड़ौदा ने भारत की जीडीपी वृद्धि को 6.5 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान जताया है. कृषि क्षेत्र ने इस वर्ष अच्छा प्रदर्शन किया है और यह एक सकारात्मक पहलू के रूप में सामने आया है, जिसमें तीसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि 5.6 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 1.5 प्रतिशत थी.

इसके अलावा, रिपोर्ट में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अपेक्षाएँ जताई गई हैं कि वह प्रमुख दरों को और कम करेगा, क्योंकि मुद्रास्फीति में कमी आई है. भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 25 आधार अंकों (bps) की कटौती करते हुए रेपो दर को 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है और इस दौरान नीति का रुख तटस्थ (neutral) रखा है. RBI गवर्नर ने कहा कि “कम प्रतिबंधक” मौद्रिक नीति की आवश्यकता है ताकि विकास को समर्थन मिल सके क्योंकि मुद्रास्फीति RBI के लक्षित दायरे में बनी हुई है.

बैंक ऑफ बड़ौदा का मानना है कि FY26 में विकास दर 6.7 प्रतिशत तक पहुँच सकती है, जो FY25 में 6.4 प्रतिशत थी. मुद्रास्फीति FY26 में 4.2 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है, जो FY25 में 4.8 प्रतिशत थी. चौथी तिमाही (Q4FY25) और पहली तिमाही (Q1FY26) में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) 4.4 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत के बीच रहेगा.

इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में भारतीय रुपया (INR) के भविष्य में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई गई है, खासकर अमेरिकी डॉलर की नीति और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अस्थिरता के कारण. रिपोर्ट का मानना है कि रुपये का आस्थिरता जारी रह सकती है, और अगले महीने में रुपये का दाम 86.75-87.75/$ तक रह सकता है, लेकिन कुछ समय के लिए यह 88/$ तक भी पहुँच सकता है.

रुपये के संबंध में, बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि भारत के मजबूत घरेलू बाजार, तेल की कीमतों का संतुलन, और मजबूत बाहरी वित्तीय बफर्स भारतीय रुपये के लिए सकारात्मक हैं, हालांकि वैश्विक वित्तीय अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए रुपये की सराहना सीमित हो सकती है.

Bharat Express Desk

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