दुनिया भर के बाजारों में छाई अनिश्चितता, लाल सागर के पास जारी भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापारिक निर्यात (Merchandise Exports) जुलाई 2026 में बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
यदि इसे भारतीय मुद्रा में बदलें (जुलाई 2026 के औसतन ₹95.41 प्रति डॉलर के एक्सचेंज रेट के हिसाब से), तो यह राशि ₹4,22,093,84,00,000 (लगभग 4,22,094 करोड़ रुपये यानी 4.22 लाख करोड़ रुपये) बैठती है.
पिछले महीने (जून 2026) भारत का कुल निर्यात 40.41 अरब डॉलर रहा था. इस लिहाज से भारत ने मात्र एक महीने में ही अपने विदेशी व्यापार के आंकड़े में जबरदस्त उछाल हासिल किया है.
दुनिया के कई बड़े देश जब आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक संकटों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में भारत के निर्यात में वृद्धि दर्ज होना भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की मजबूती को प्रदर्शित करता है.
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया को बताया कि भारत से बाहर भेजे जाने वाले सामान में इस उल्लेखनीय बढ़ोतरी की मुख्य वजह देश के इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और समुद्री (मरीन) उत्पादों की विदेशी बाजारों में भारी मांग रही है.
विशेष रूप से पश्चिमी एशियाई देशों को भारत का निर्यात जुलाई महीने में 8.62 प्रतिशत बढ़कर 5.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया.
भारत सरकार के प्रोत्साहन और ‘मेक इन इंडिया’ की बदौलत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत तेजी से उभरा है. जुलाई के महीने में निर्यात बढ़ाने वाले प्रमुख सेक्टर्स का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
इंजीनियरिंग सामान (Engineering Goods): यह भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बना हुआ है. भारी मशीनरी, ऑटो कंपोनेंट्स और इंडस्ट्रियल टूल्स के निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics & Smartphones): भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते निर्माण के कारण यह सेक्टर सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है.
रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery): यूएई और ओमान जैसे देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (CEPA) के कारण भारतीय आभूषणों का निर्यात लगातार मजबूत हुआ है.
पेट्रोलियम उत्पाद (Petroleum Products): वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारतीय रिफाइनरी उत्पादों की यूरोप और एशियाई बाजारों में मांग बरकरार रही.
फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals): दुनिया की प्रयोगशाला माने जाने वाले भारत से जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का बड़े पैमाने पर निर्यात हुआ.
एक तरफ जहां निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ भारत का कुल आयात (Imports) भी जुलाई में बढ़कर 76.22 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो जून में 70.84 अरब डॉलर था.
आयात बढ़ने का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ना और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बाधित होना है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है. लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में हूथी विद्रोहियों के हमलों से भी खाड़ी देशों से आने वाले जहाजों का किराया और समय बढ़ा है.
ज्यादा आयात के कारण जुलाई में भारत का वस्तु व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया.
हाल ही में सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि व्यापार घाटे में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था की किसी कमजोरी को नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति, औद्योगीकरण और घरेलू खपत को दर्शाती है.
भारत के आयात का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे, कीमती धातुएं, औद्योगिक मशीनरी, उर्वरक और मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल से मिलकर बना है. यह आयात देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को गति देने और भारतीय कारखानों को चलाने के लिए अनिवार्य हैं.
मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल से जुलाई 2026) की संचयी (Cumulative) अवधि के दौरान भारत का कुल व्यापारिक निर्यात 17.04 प्रतिशत बढ़कर 173.78 अरब डॉलर हो गया है. वहीं इस अवधि के दौरान कुल आयात 19.27 प्रतिशत बढ़कर 292.38 अरब डॉलर रहा है.
भारत ने पिछले पांच वर्षों में वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपने निर्यात ढांचे को काफी मजबूत किया है. कोरोना महामारी और वैश्विक मंदी के दौर से उबरकर भारत ने निर्यात के क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बनाए हैं.
भारत का वार्षिक व्यापारिक निर्यात (FY 2021-22 से FY 2025-26)
वर्ष (Financial Year) कुल निर्यात वार्षिक बदलाव / स्थिति
2021-22 $422.00 Billion ₹31.65 लाख करोड़ महामारी के बाद रिकॉर्ड उछाल
2022-23 $451.07 Billion ₹36.98 लाख करोड़ 6.88% की ठोस वृद्धि
2023-24 $437.06 Billion ₹36.27 लाख करोड़ वैश्विक मंदी के कारण गिरावट
2024-25 $447.20 Billion ₹37.56 लाख करोड़ पुनः सुधार दर्ज किया गया
2025-26 $482.50 Billion ₹42.94 लाख करोड़ सर्वकालिक उच्च स्तर (Record High)
(स्रोत: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार)
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