क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय निजी क्षेत्र अब निवेश के लिए पहले से कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है. पिछले एक दशक में निजी कंपनियों की वित्तीय स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, जिससे उन्हें नए निवेशों को लागू करने के लिए अधिक लचीलापन प्राप्त हुआ है.
रिपोर्ट के अनुसार, निजी कंपनियों ने समय के साथ अपने कर्ज को कम किया है, जिससे उनकी बैलेंस शीट मजबूत हुई है. इसके अलावा, कम पूंजी खर्च, सरकारी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने वाली योजनाओं, ताजा इक्विटी जारी करने और क्षमता उपयोग में सुधार ने इस प्रक्रिया को तेज किया है. कई कंपनियों ने अपने लाभ का उपयोग कर्ज चुकाने के लिए किया है.
इसके परिणामस्वरूप, कंपनियों का कर्ज-नेट वर्थ अनुपात 2015 में 1.05 गुना से घटकर 2025 में अनुमानित 0.50 गुना हो गया है, जो दर्शाता है कि कंपनियों के पास विस्तार के लिए नया कर्ज लेने की पर्याप्त क्षमता है.
साथ ही, बैंकों की वित्तीय स्थिति भी सुधरी है. बैंकों का सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (GNPA) अनुपात मार्च 2018 में 11.2 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में अनुमानित 2.5 प्रतिशत हो गया है. इस गिरावट का मुख्य कारण नई खराब ऋणों की संख्या में कमी, तनावग्रस्त संपत्तियों से वसूली और ऋण माफी है. इन सुधारों ने बैंकों को उद्योगों और निजी कंपनियों को बेहतर क्रेडिट सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम बनाया है.
सरकारी नीतियों ने भी निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, मेक इन इंडिया पहल, उदारीकरण किए गए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नीतियां, कॉर्पोरेट करों में कमी, बुनियादी ढांचे का विकास, माल और सेवा कर (GST) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना योजनाओं ने निवेश के माहौल में सुधार किया है.
निजी उपभोग जो वित्तीय वर्ष 2024 में कमजोर ग्रामीण मांग के कारण 5.6 प्रतिशत पर आ गया था, 2025 में 7.6 प्रतिशत तक सुधारने की उम्मीद है. यह सुधार कृषि आय में वृद्धि और कम महंगाई के कारण होगा. हालांकि, शहरी मांग पर उच्च ब्याज दरों और असुरक्षित ऋणों के लिए कड़े उधारी नियमों का असर पड़ा है.
हालांकि घरेलू स्थिति मजबूत है, वैश्विक अनिश्चितता अब भी कॉर्पोरेट निवेश के लिए एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ उपायों का पहले ही उभरते बाजारों से पूंजी बहाव, मुद्रा अवमूल्यन और चीन से बढ़ती आयात चिंताओं पर असर पड़ा है. इन कारकों ने निवेश माहौल को अनिश्चित बना दिया है, जिसके कारण निजी कंपनियां प्रमुख निर्णयों में देरी कर रही हैं.
हालांकि, भारतीय सरकार घरेलू मांग को बढ़ावा देने और एक अनुकूल निवेश वातावरण बनाने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है, जो धीरे-धीरे कॉर्पोरेट निवेशों में वृद्धि को बढ़ावा देगा. बजट में मध्यम वर्ग के लिए किए गए कर लाभ घरेलू खपत को समय के साथ मजबूत करने की संभावना है. इसके अलावा, कम ब्याज दरें और नियंत्रित महंगाई उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को बढ़ाएंगे और मांग को प्रोत्साहित करेंगे.
हालांकि घरेलू परिस्थितियाँ बेहतर हैं, फिर भी वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम और टैरिफ क्रियावली से उत्पन्न अनिश्चितता निजी कंपनियों को नए निवेशों के लिए सतर्क बनाए रखेगी.
-भारत एक्सप्रेस
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