बिजनेस

KVIC का कारोबार 1.7 लाख करोड़ रुपये के पार, रोजगार सृजन में 50% की वृद्धि

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने वित्त वर्ष 2024–25 में ₹1.70 लाख करोड़ का ऐतिहासिक कारोबार किया है, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है. यह उपलब्धि उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाती है. KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार ने सोमवार को राजघाट स्थित KVIC मुख्यालय में इन आंकड़ों की घोषणा की.​

उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

वित्त वर्ष 2013–14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन ₹26,109 करोड़ और बिक्री ₹31,154 करोड़ थी, वहीं 2024–25 में उत्पादन ₹1.16 लाख करोड़ और बिक्री ₹1.70 लाख करोड़ तक पहुंच गई. इससे उत्पादन में 347% और बिक्री में 447% की वृद्धि हुई है.​

खादी वस्त्रों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. 2013–14 में ₹811 करोड़ का उत्पादन बढ़कर 2024–25 में ₹3,783 करोड़ हो गया, जो 366% की वृद्धि दर्शाता है. वहीं, बिक्री ₹1,081 करोड़ से बढ़कर ₹7,145 करोड़ तक पहुंच गई, जो 561% की वृद्धि है.​
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रोजगार सृजन में अभूतपूर्व वृद्धि

KVIC की योजनाओं के तहत 11 वर्षों में रोजगार सृजन में 49.23% की वृद्धि हुई है, जिससे 1.94 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है. इसमें 80% महिलाएं शामिल हैं, जो खादी कारीगरों की कुल संख्या का हिस्सा हैं. इसके अलावा, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत अब तक 10.18 लाख इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिससे 90 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है.​

ग्रामोद्योग विकास योजना में बढ़ी हुई बजट

ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत FY 2025–26 के लिए बजट में 134% की वृद्धि की गई है, जो ₹60 करोड़ तक पहुंच गया है. अब तक 2.87 लाख से अधिक मशीनें और टूलकिट वितरित की गई हैं, जिनमें मिट्टी के चाक, मधुमक्खी बॉक्स, अगरबत्ती बनाने की मशीनें और शिल्प टूलकिट शामिल हैं.​

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका

KVIC अध्यक्ष मनोज कुमार ने इस सफलता का श्रेय महात्मा गांधी की प्रेरणा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन और ग्रामीण कारीगरों की मेहनत को दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खादी को एक फैशन प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे युवा वर्ग में खादी के प्रति आकर्षण बढ़ा है.​

KVIC की यह उपलब्धि न केवल खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों की सफलता का प्रतीक भी है. यह भारत को 2047 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.​

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-भारत एक्सप्रेस

Aarika Singh

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