देशभर में प्याज की कीमतों को लेकर सरकार सतर्क है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंडियों में प्याज की आवक, बाजार में इसकी उपलब्धता और खुदरा कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है. कोशिश यही है कि आने वाले महीनों में मांग बढ़ने के बावजूद आम लोगों को प्याज के लिए ज्यादा कीमत न चुकानी पड़े और बाजार में इसकी सप्लाई सामान्य बनी रहे.
सरकार के आकलन के मुताबिक, चालू वर्ष 2025-26 में देश में करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन होने की उम्मीद है. पिछले साल यानी 2024-25 में उत्पादन लगभग 307.67 लाख मीट्रिक टन रहा था. यानी इस साल उत्पादन पिछले वर्ष के आसपास ही रहने का अनुमान है. इसके अलावा सरकार के पास प्याज का पर्याप्त बफर स्टॉक भी मौजूद है, जिसे जरूरत पड़ने पर बाजार में उतारा जा सकता है.
सरकार की मूल्य स्थिरीकरण नीति का मकसद सिर्फ कीमतें कम रखना नहीं है. इसमें किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा जा रहा है. सरकार का कहना है कि कोशिश यह है कि उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ी कीमतों का सामना न करना पड़े, लेकिन साथ ही किसानों को उनकी फसल का उचित दाम भी मिले.
दरअसल, अगस्त और सितंबर के महीनों में प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव आम बात है. इस दौरान त्योहारी सीजन के कारण मांग बढ़ सकती है. बारिश और मौसम की स्थिति का असर भी प्याज की आवक पर पड़ता है. इसके अलावा मंडियों से बड़े शहरों तक प्याज पहुंचने की लागत और सप्लाई चेन में बदलाव भी कीमतों को प्रभावित करते हैं.
ऐसे में सरकार की नजर खास तौर पर उन बाजारों पर है जहां मांग ज्यादा है या कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है. मंडियों में पर्याप्त प्याज पहुंचाने के साथ-साथ बड़े शहरों में जरूरत के मुताबिक लक्षित खुदरा बिक्री भी की जा रही है.
सरकार इस बार भी बफर स्टॉक को एक साथ बाजार में उतारने के बजाय जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे जारी कर रही है. अलग-अलग राज्यों में कीमतों और बाजार की स्थिति की निगरानी की जा रही है. इसके आधार पर तय किया जा रहा है कि किस शहर या इलाके में कितनी मात्रा में प्याज भेजना है और कब भेजना है.
इस पूरी कवायद में अब ‘कांदा एक्सप्रेस’ भी अहम भूमिका निभा रही है. इसके जरिए रेलवे रैक से बड़ी मात्रा में प्याज को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है. इससे परिवहन में आसानी होती है, लॉजिस्टिक्स लागत घटती है और ज्यादा मात्रा में प्याज कम समय में प्रमुख खपत वाले शहरों तक पहुंचाया जा सकता है.
‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल की शुरुआत 2024-25 में की गई थी. उस दौरान 14 रेलवे रैक के जरिए करीब 12,000 मीट्रिक टन प्याज पांच शहरों तक पहुंचाया गया था. इसके बाद 2025-26 में इस व्यवस्था को बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया. इस दौरान 86 रेलवे रैक के जरिए लगभग 88,000 मीट्रिक टन प्याज देश के 16 प्रमुख शहरों तक भेजा गया.
पिछले साल के अनुभव को देखते हुए 24 अगस्त से नासिक से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की ढुलाई और बफर स्टॉक की बिक्री दोबारा शुरू कर दी गई है. शुरुआती चरण में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी को इसमें शामिल किया गया है. अगर किसी दूसरे शहर में भी मांग या कीमतों के लिहाज से जरूरत महसूस होती है, तो आगे वहां भी सप्लाई बढ़ाई जा सकती है.
यह भी पढ़ें- आखिरी दौर में टूटी अमेरिका-कनाडा डील! ट्रंप की किस शर्त पर भड़के कार्नी?
-भारत एक्सप्रेस
GST Reform Compliance Refund Process: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि GST सुधारों का अगला…
नंदीग्राम उपचुनाव से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के…
हीरो विडा इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री में अगस्त में 108% का उछाल आया है. मात्र…
Natarajasana Preparatory Yoga Poses: नटराजासन एक कठिन बैलेंसिंग और बैकबेंड योगासन है, जिसे करने से…
समाधान अभियान के वार्षिक दिवस 2026 में जारी अध्ययन के अनुसार, अधिकांश लोग पॉक्सो शब्द…
साल 2026 का मेडिसिन नोबेल पुरस्कार कार्ल डाइसरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल को ऑप्टोजेनेटिक्स…