बिजनेस

सोने से 50 गुना सस्ती चांदी अब क्यों महंगी हो रही? ₹3 लाख के पार जा पहुंची कीमत, जानें— आखिर कहां पाई जाती है यह धातु

भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों जो हो रहा है, वह असल में एक रिकॉर्डतोड़ सुनामी है. सोने की कीमतें तो बढ़ ही रही हैं, लेकिन चांदी ने तो सारा गणित ही बिगाड़ दिया हैं. जिस चांदी को 1 लाख से 2 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने में 14 महीने का लंबा वक्त लगा था, उसने 2 लाख से 3 लाख का आंकड़ा पार करने में सिर्फ एक महीना लिया. दिल्ली के बाजारों में तो भाव 3.23 लाख रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचा हैं.

कल तक ‘गरीबों का सोना’ कही जाने वाली चांदी अचानक इतनी कीमती कैसे हो गई? और क्या यह सिर्फ निवेश का खेल है या इसके पीछे कोई बड़ी ग्लोबल वजह है?

दुनिया में कहां से आती है इतनी चांदी?

चांदी के भंडार के मामले में अमेरिकी महाद्वीप का दबदबा है. मैक्सिको दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है; यहां दुनिया की 10 सबसे बड़ी खदानों में से 4 अकेले मौजूद हैं. इसके अलावा पेरू, चीन और पोलैंड भी इसके बड़े उत्पादक हैं. दिलचस्प बात यह है कि चांदी अब सिर्फ जमीन के अंदर ही नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों (हाइड्रोथर्मल वेंट्स) में भी तलाशी जा रही है.

क्यों बढ़ी इसकी डिमांड?

चांदी की इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे सबसे बड़ा हाथ इंडस्ट्री का है. कुल चांदी का 50% से ज्यादा हिस्सा कारखानों में इस्तेमाल होता है:

  • ग्रीन एनर्जी का फ्यूल: सोलर पैनल, विंड एनर्जी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) के बिना ‘नेट जीरो’ का सपना अधूरा है, और इन सबमें चांदी का भारी इस्तेमाल होता है.
  • AI और टेक क्रांति: डेटा सेंटर और हाई-टेक गैजेट्स में चांदी सबसे बेहतरीन कंडक्टर (बिजली का सुचालक) होने के कारण पहली पसंद है. एलन मस्क तक कह चुके हैं कि कई औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए चांदी अनिवार्य है.
  • मेडिकल जगत: चांदी में बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत होती है, इसलिए इसे पट्टियों, क्रीम और सर्जरी के उपकरणों में इस्तेमाल किया जाता है.

कीमतों में इतना अंतर क्यों?

आज भी सोना, चांदी से करीब 50 गुना ज्यादा महंगा है. इसके कुछ बुनियादी कारण हैं. पहला यह है कि धरती पर सोने के मुकाबले चांदी लगभग 10 गुना ज्यादा मात्रा में मौजूद है.दूसरा यह की चांदी अक्सर तांबा या जस्ता निकालते वक्त ‘एक्स्ट्रा’ मिल जाती है, जिससे इसकी माइनिंग कॉस्ट कम रहती है. सोना कभी काला नहीं पड़ता, जबकि चांदी हवा के संपर्क में आकर काली पड़ जाती है. यही वजह है कि केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोने को ज्यादा तवज्जो देते हैं.

आखिर क्यों लगी है कीमतों में आग ?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘विस्फोटक’ तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  • जियोपॉलिटिकल टेंशन: ईरान के साथ बढ़ता तनाव और नाटो (NATO) को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को डरा दिया है. जब दुनिया में युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो लोग कैश के बजाय सोना-चांदी खरीदना सुरक्षित समझते हैं.
  • सप्लाई और डिमांड का गैप: मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन माइनिंग उस रफ्तार से नहीं बढ़ पा रही. इसी कमी को देखते हुए अमेरिका ने इसे ‘क्रिटिकल मिनरल’ की लिस्ट में डाल दिया है.
  • पोर्टफोलियो इंश्योरेंस: निवेशक अब चांदी को सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि अपनी संपत्ति को आर्थिक मंदी से बचाने वाले ‘बीमे’ की तरह देख रहे हैं.

ये भी पढ़ें: अडानी ग्रुप का महाराष्ट्र में 66 अरब डॉलर का निवेश प्लान

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

Recent Posts

LG डॉ. दिनेश शर्मा का अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर दौरा: हॉप-ऑन हॉप-ऑफ बसों का शुभारंभ, दिए ये बड़े तोहफे

Lieutenant Governor Swaraj Dweep visit: उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा के स्वराजद्वीप दौरे पर मिलीं कई…

3 hours ago

पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे को मिला राष्ट्रपति पुलिस पदक, राज्यपाल ने किया सम्मानित

Vinoy Kumar Choubey Presidents Police Medal: पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस कमिश्नर IPS विनय कुमार चौबे को विशिष्ट…

3 hours ago