टाटा संस AGM में पहली बार टूटा कोरम
Tata Sons AGM 2026: भारत के सबसे प्रतिष्ठित और 158 साल पुराने औद्योगिक साम्राज्य ‘टाटा समूह’ (Tata Group) के मुख्यालय ‘बॉम्बे हाउस’ में इस हफ्ते वह ऐतिहासिक बवंडर आया जो इसके पूरे इतिहास में कभी नहीं हुआ था. बता दें कि 18 अगस्त 2026 को दोपहर ठीक 2:30 बजे टाटा संस की 108वीं वार्षिक आम बैठक यानी AGM शुरू तो हुई, लेकिन चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन समेत दिग्गज निदेशकों की मौजूदगी के बावजूद महज़ 30 मिनट के अंदर बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा.
इसकी वजह थी-‘कोरम’ यानी न्यूनतम सदस्यों की उपस्थिति का पूरा न होना. बाहर से यह सिर्फ एक तकनीकी पन्ना दिख रहा है, लेकिन अंदर चल रही कॉरपोरेट खींचतान टाटा के चैरिटी फंड को हर दिन लाखों रुपये की चोट पहुंचा रही है.
टाटा संस के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अब तक के सबसे ऐतिहासिक 4,478.58 करोड़ रुपये के डिविडेंड की सिफारिश की थी. इसमें से टाटा ग्रुप की दो सबसे बड़ी परोपकारी संस्थाओं-‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट’ (SDTT) और ‘सर रतन टाटा ट्रस्ट’ (SRTT) का हिस्सा लगभग 2,300 से 2,900 करोड़ रुपये बनता है. लेकिन AGM में कोरम न होने की वजह से इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लग पाई. नतीजे में जो पैसा तुरंत ट्रस्ट के खातों में पहुंचकर देश सेवा में लगना था, वह कागजी दांव-पेच में बंद होकर रह गया है!
वित्तीय आंकड़ों का यह गणित किसी भी सामाजिक संस्था की कमर तोड़ सकता है. अगर 2,900 करोड़ रुपये के इस फंड को सुरक्षित सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) में 7% सालाना ब्याज पर रखा जाता, तो इससे रोज़ाना 55.6 लाख की कमाई होती! नियमों के मुताबिक अगली AGM की तारीख अब बोर्ड तय करेगा, जिसमें कम से कम 60 दिनों की देरी तय मानी जा रही है. 60 दिनों की इस देरी का मतलब है कि टाटा ट्रस्ट्स लगभग 33 से 36 करोड़ का शुद्ध ब्याज हमेशा के लिए खो देंगे! यह वह पैसा है जो कैंसर अस्पतालों के संचालन, अनाथ बच्चों की पढ़ाई और गांवों के विकास पर खर्च होना था.
इस पूरे विवाद की असली जड़ महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट (MPTA) का नया संशोधन (Section 30A) है, जिसके तहत किसी पब्लिक ट्रस्ट में 25% से ज्यादा लाइफटाइम ट्रस्टी नहीं हो सकते. SRTT में यह संख्या 50% थी. इसी शिकायत पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई 2026 में SRTT पर बोर्ड बैठकें करने और कोई नया प्रतिनिधि भेजने पर अंतरिम रोक लगा दी थी.
टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM का कोरम पूरा करने के लिए दोनों मुख्य ट्रस्टों का ‘संयुक्त प्रतिनिधि’ होना अनिवार्य है. चूंकि SRTT रोक के कारण प्रतिनिधि तय नहीं कर सका, इसलिए एजीएम बिना किसी नतीजे के धरी की धरी रह गई!
देश के सबसे महंगे वकीलों की फौज रखने वाला टाटा ग्रुप सीधे हाई कोर्ट क्यों नहीं जा रहा? इसकी इनसाइड स्टोरी बेहद दिलचस्प है..बता दें चैरिटी कमिश्नर के सामने इस रोक को हटाने की अंतिम सुनवाई 8 सितंबर 2026 को तय है. वकीलों की सलाह है कि सुनवाई से पहले सीधे हाई कोर्ट जाने पर याचिका प्री-मेचर कहकर खारिज हो सकती है, जिससे और समय बर्बाद होगा.
हालांकि, अंदरूनी सूत्रों की मानें तो टाटा के लीगल एक्सपर्ट्स चुपचाप हाई कोर्ट जाने के लिए बैकअप प्लान की ड्राफ्टिंग भी पूरी तरह तैयार रखे हुए हैं.
यह भी पढ़ें: Tata Sons का नया दौर: 40 साल बाद विदा हो रहे एन. चंद्रशेखरन, कौन संभालेगा भारत का सबसे बड़ा बिजनेस एंपायर?
ज्ञात रहे यह कानूनी जंग सिर्फ पैसों या डिविडेंड तक सीमित नहीं है बल्कि इससे टाटा समूह के भविष्य का नेतृत्व भी अधर में लटक गया है! टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने ऐलान किया है कि वे फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद पद छोड़ देंगे.
यह भी बता दें कि नोएल टाटा की अगुवाई वाले टाटा ट्रस्ट्स को नया चेयरमैन चुनने के लिए 5-सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी बनानी है, जिसमें 3 सदस्य दोनों मुख्य ट्रस्टों द्वारा संयुक्त रूप से चुने जाने हैं. यानी SRTT पर लगी रोक ने सिर्फ एजीएम और चैरिटी के पैसों को ही नहीं, बल्कि अगले ‘टाटा चेयरमैन’ की खोज पर भी ब्रेक लगा दी है.
-भारत एक्सप्रेस
Hindi Literature: विश्व प्रसिद्ध आरती 'ओम जय जगदीश हरे' के रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी न…
UP Rajya Sabha Election: यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में सपा ने रामगोपाल…
सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत को चुनौती देने…
Gwalior News: ग्वालियर के डबरा में बेसहारा गोवंश की दुर्दशा से नाराज गौ सेवकों ने…
लैंड फॉर जॉब से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कानूनी प्रक्रिया एक नए मोड़ पर…
Paul Newman Charity: हॉलीवुड एक्टर पॉल न्यूमैन ने 1982 में दोस्तों को गिफ्ट देने के…