Tata Trusts board controversy
Tata Trusts board controversy: टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. टाटा ट्रस्ट्स के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष एक नई आपत्ति दायर करते हुए सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) के कई ट्रस्टियों की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया है कि नोएल टाटा (Noel Tata), वेणु श्रीनिवासन (Venu Srinivasan) और विजय सिंह (Vijay Singh) सहित पांच ट्रस्टियों की ट्रस्टीशिप कानून और फिड्यूशरी दायित्वों के उल्लंघन से जुड़ी हो सकती है.
मेहली मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि विजय सिंह ने टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों में निदेशक रहते हुए कमीशन और अन्य भुगतानों के रूप में करीब ₹15.89 करोड़ की आय हासिल की.
आरोपों के अनुसार, विजय सिंह को टाटा संस और अन्य कंपनियों से भी भुगतान मिला. इसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स से लगभग ₹3.52 करोड़ मिलने की बात कही गई है. इसके अलावा टाटा लॉकहीड मार्टिन और टाटा सिकोरस्की जैसी कंपनियों से भी भुगतान होने का दावा किया गया है. मिस्त्री का कहना है कि यह स्थिति ट्रस्ट की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियों के खिलाफ है.
मेहली मिस्त्री ने वीनू श्रीनिवासन पर भी हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि वे टीवीएस समूह से जुड़े एक उपक्रम में कंसल्टेंट के रूप में काम कर रहे थे, जबकि वे टाटा संस के निदेशक भी हैं. मिस्त्री के अनुसार यह स्थिति फिड्यूशरी ड्यूटी के उल्लंघन की ओर इशारा करती है.
मिस्त्री ने यह भी दावा किया है कि 17 अक्टूबर 2024 के एक प्रस्ताव के तहत सभी ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति की बात थी, लेकिन इसे सभी पर समान रूप से लागू नहीं किया गया. उनके अनुसार कुछ ट्रस्टियों को इसका लाभ मिला, जबकि कुछ को हटा दिया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पूर्व ट्रस्टी ने उस समय वोटिंग में हिस्सा लिया, जब वह कानूनी रूप से पद पर नहीं थे. इससे पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठता है.
मिस्त्री का कहना है कि इन कथित अनियमितताओं के कारण ट्रस्ट बोर्ड का गठन वैध नहीं रह गया है. उनके अनुसार कई फैसले “शून्य” भी माने जा सकते हैं. उन्होंने महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट की धारा 30A का हवाला देते हुए कहा कि इससे पुनर्नियुक्तियों की वैधता पर असर पड़ता है. यह मामला अब ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
मेहली मिस्त्री ने आयोग से मांग की है कि, वर्तमान ट्रस्टी बोर्ड को हटाया जाए. एक स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त किया जाए ताकि ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता और वैधता बहाल हो सके. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य ट्रस्ट में वापसी नहीं, बल्कि सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है.
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यह विवाद तब शुरू हुआ जब मिस्त्री ने पिछले वर्ष भी टाटा ट्रस्ट्स के भीतर कुछ नियुक्तियों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए थे. टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66% हिस्सेदारी है, जिससे यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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