Unitech crisis
कभी भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में गिनी जाने वाली यूनिटेक लिमिटेड अब बुरी तरह संकट में फंसी है. साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कंपनी का जिम्मा कोर्ट द्वारा नियुक्त एक प्रबंधन टीम को सौंपा गया था, लेकिन तब से हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं.
हजारों लोग आज भी अपने घरों का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि वो सालों से ईएमआई भर रहे हैं. दूसरी ओर, कंपनी का नया प्रबंधन आराम से सरकारी घरों में रह रहा है और कोर्ट की सुरक्षा के तहत काम कर रहा है. इससे लोगों में गुस्सा और अविश्वास और भी बढ़ गया है.
नोएडा, गुरुग्राम और चेन्नई जैसे शहरों में यूनिटेक के पास बहुत कीमती ज़मीन है. लेकिन समाधान योजना में इस जमीन का बेहद कम दाम लगाया गया है. उदाहरण के लिए, नोएडा की ज़मीन की कीमत सिर्फ ₹5,641 करोड़ बताई गई है, जबकि कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञ इसका मूल्य ₹40,000 करोड़ तक मानते हैं. कई लोगों का कहना है कि जानबूझकर कम आंक कर कंपनी की क्षमता को छिपाया जा रहा है.
एमडी युधवीर सिंह मलिक की अगुवाई में कंपनी को अब तक ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा का घाटा हो चुका है. नोएडा प्राधिकरण के बकाये भी ₹2,700 करोड़ से बढ़कर ₹11,000 करोड़ हो गए हैं. जानकारों का मानना है कि ये सब कंपनी के दिवालिया होने की वजह से नहीं, बल्कि खराब फैसलों, देरी और अनुभव की कमी की वजह से हुआ है.
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कंपनी के खिलाफ कानूनी मुकदमे भी तेजी से बढ़े हैं. खरीदारों और निवेशकों का आरोप है कि मौजूदा प्रबंधन मदद करने की बजाय सब कुछ नौकरशाही तरीके से चला रहा है, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं.
कंपनी के मौजूदा एमडी युधवीर सिंह मलिक पर भी सवाल उठ रहे हैं. उनके पुराने कामकाज में भी विवाद रहे हैं, जैसे कि नेस्ले इंडिया विवाद और पावर का मिसयूज़ करने के आरोप.
एक खरीदार प्रतिनिधि ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का दखल उम्मीद की एक किरण था, लेकिन अब रास्ता भटक गया है. अब सही कदम उठाने की ज़रूरत है और वो भी तुरंत.”
निवेशकों की मांग है कि मौजूदा प्रबंधन को हटाया जाए. समाधान योजना की दोबारा समीक्षा हो. इसके साथ ही एक अनुभवी और प्रोफेशनल टीम को लाया जाए. खरीदारों को जल्द से जल्द उनके घर मिलें
खरीदारों और निवेशकों की साफ मांग है कि यूनिटेक को अब ऐसे लोगों के हाथों में दिया जाए जिनके पास रियल एस्टेट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का असली अनुभव हो. उनका कहना है कि मौजूदा टीम से कोई उम्मीद नहीं बची है.
– भारत एक्सप्रेस
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